क्या आप भी मेरे तरह इस वीकेंड या सावन के महीने में बुंदेलखंड के सबसे चमत्कारी शिव मंदिर, श्री जागेश्वर धाम बांदकपुर दमोह जाने का प्लान बना रहे हैं? तो जरा रुकिए! वहां की ट्रेन पकड़ने या गाड़ी स्टार्ट करने से पहले, यह एक छोटी सी गाइड जो मैंने बांदकपुर धाम जाने से पहले बनाई वह आपके बहुत काम आने वाली है।
आज के इस लेख में हम सिर्फ इस स्थान और मंदिर के इतिहास की बात नहीं करेंगे, बल्कि आपको बताएंगे कि वहां रुकने की सबसे अच्छी व्यवस्था कहाँ है, कम भीड़ में दर्शन कैसे करें, और बांदकपुर के पास ऐसी कौन सी खुफिया जगहें हैं जिन्हें आपको मिस नहीं करना चाहिए।
मंदिर के पास में बहुत सारी छोटी बड़ी दुकान लगी रहती है। जहाँ से आप प्रसाद और पूजन की सामग्री भी खरीद सकते है। इसके अलावा यहाँ पर फल फूल की दुकान भी मौजूद है। यहाँ पर आप ओर अन्य प्रकार के सामान भी खरीद सकते है।
यात्रा के साथ-साथ लोग शुभ महूर्त में साल भर हिन्दू लोंगों का विवाह का आयोजन भी इसी मंदिर में होता रहता है। यहाँ बहुत दूर-दूर से विवाह के लिए जोड़े के साथ आतें हैं। साथ ही विशेष पर्व और महूर्त में बहुत बड़ा सामुदायिक विवाह का आयोजन होता हैं जिसमें सैकड़ों की संख्या में वर-वधु विवाह के बंधन में बंध जातें हैं।
श्री जागेश्वर नाथ धाम बांदकपुर भारत के मध्य प्रदेश राज्य के विश्व प्रसिद्ध बुंदेलखंड क्षेत्र में स्थित छोटे से जिले दमोह से 18 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक छोटा सा अर्ध शहरी बांदकपुर क़स्बा है। यहाँ का मंदिर बहुत ही सुन्दर, चमत्कारिक और अलौकिक हैं। यह भगवान शिव को समर्पित प्रसिद्ध जागेश्वर नाथ मंदिर के लिए जाना जाता है। भगवान शिव शंकर की नगरी बांदकपुर (Bandakpur Damoh ) तीर्थ स्थलों में से एक हैं। रहस्यमयी शिव मंदिर है।
यदि आप बांदकपुर यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो क्या आप जानना चाहते हैं , वो 5 बातें जिनमे बांदकपुर महादेव की वो अनसुनी कहानी, जो आपकी आँखों में आंसू ला देगी
श्री जागेश्वर धाम बांदकपुर दमोह का वो रहस्य, जो 90% लोग वहां जाकर भी नहीं जानते
- स्वयंभू शिवलिंग : यहाँ स्थापित शिवलिंग अनादिकाल से विराजमान है और इसे देश का तेरहवाँ ज्योतिर्लिंग भी माना जाता है।
- शिवलिंग का चमत्कार हर वर्ष आकार बढ़ना: ऐसी मान्यता है और स्थानीय लोगों का विश्वास है कि यह शिवलिंग हर साल थोड़ा-थोड़ा चौड़ा यानी बड़ा होता जा रहा है, जिसका रहस्य आज भी अज्ञात है। कभी-कभी शिवलिंग बीच से गूंजी महादेव की आवाज! जब आप जाये तो आस्था के साथ सुनने की कोशिश करें शायद आपको भी सुनाई दें!
- मंदिर निर्माण: इस वर्तमान मंदिर का जीर्णोद्धार/निर्माण 1711 ईस्वी में मराठा शासक दीवान बालाजी राव चंदोरकर द्वारा करवाया गया था।
- जागेश्वर धाम परिसर: विशाल प्रांगण में मुख्य शिव मंदिर के अलावा माता पार्वती, राधा-कृष्ण, देवी दुर्गा, काल भैरव और भगवान विष्णु के मंदिर भी स्थित हैं।
- शिवलिंग के ऊपर कुल्हाड़ी का निशान: बांदकपुर महादेव की वो अनसुनी कहानी, जो आपकी आँखों में आंसू ला देगी कुल्हाड़ी की वो चोट और बहती खून की धारा…
- कुछ मान्यताओं और कथाओं के अनुसार यहाँ पर भगवान शिव रूपनाथ धाम से पहाड़ों के बीच से होकर जागेश्वर धाम पहुंचे थे। यहाँ पर जो शिवलिंग है, वह पाताललोक तक अनंत गहराई तक स्थित है।
बांदकपुर धाम कैसे पहुंचें?
बांदकपुर धाम आप बस, ट्रेन और बाय रोड आप अपने वाहन से आ सकते है, यहाँ आपको कार 20 रुपये और बाईक 10 रुपये पार्किंग की सुविधा भी मिल जायगी जिसका आपको चार्ज पे करना पड़ेगा। अगर आप भीड़-भाड से बचना चाहते है तो, तब आये श्री जागेश्वर मंदिर बांदकपुर जब विशेष पर्वों का समय न हो।
बांदकपुर धाम सड़क मार्ग की जानकारी:
- बांदकपुर दमोह जिला मुख्यालय से लगभग सड़क मार्ग द्वारा करीब 15-20 किमी की दूरी पर स्थित है।
- दमोह-सागर और कटनी से यहाँ के लिए आसानी से बसें और टैक्सी मिल जाती हैं।
- यह मंदिर मुख्य हाई-वे से 8 किलोमीटर अंदर की ओर जाना पड़ता है।
- यह कटनी-दमोह राजमार्ग में स्थित है।
- यदि आप दमोह मार्ग से मन्दिर पहुंचना चाहते है तो आपको 18 किलोमीटर की दुरी तय करके आना पड़ेगा।
- यदि आप सागर से बांदकपुर आयेंगे तो यह 96 किलोमीटर की दुरी पर पड़ेगा।
- कटनी और बांदकपुर की दुरी लगभग 94 किलोमीटर है।
- इसके अलावा जबलपुर से बांदकपुर की दुरी 120-122 किलोमीटर का सफ़र तय करना पड़ेगा।
बांदकपुर धाम रेल मार्ग:
बांदकपुर रेलवे स्टेशन है, जो दमोह-कटनी रेल खंड पर स्थित है, जहाँ आप सीधे बांदकपुर रेलवे स्टेशन से जागेश्वर शिव मंदिर की दूरी 4 किलोमीटर की दुरी तय करके मंदिर पहुंच सकते है।
बांदकपुर धाम हवाई मार्ग:
सबसे नजदीकी हवाई अड्डा जबलपुर (लगभग 133 किमी दूर) है।
जागेश्वर धाम कब जाना चाहिए? घूमने का सबसे अच्छा समय
अगर आप भारी भीड़ से बचना चाहते है तो, श्री जागेश्वर धाम जाने के लिए सबसे अच्छा समय अप्रैल से जून और सितंबर से नवंबर के बीच का होता है। लेकिन ध्यान रहे, प्रमुख त्यौहार , विशेष दिन और हिन्दू विवाह महुर्तों के समय न जाएँ क्योंकि यहाँ सामूहिक विवाहों का आयोजन होता रहता हैं। बांदकपुर बसंत पंचमी और शिवरात्रि पर अपने वार्षिक मेला आयोजनों के लिए भी प्रसिद्ध है।
• प्रमुख त्यौहार: महाशिवरात्रिऔर बसंत पंचमी पर यहाँ भगवान शिव के भक्तों के लिए इस दौरान यहाँ विशेष मेले का आयोजन होता है और भारी भीड़ होती है।
• विशेष दिन: सावन मास, सोमवार और सोमवती अमावस्या के दिन दर्शन करना विशेष फलदायी माना जाता है।
• मौसम: अक्टूबर से मार्च के बीच का समय यहाँ घूमने और मौसम का आनंद लेने के लिए सबसे अच्छा रहता है।
बांदकपुर धाम मंदिर का गेट खुलने दर्शन और आरती का सही समय
⏰ मंदिर का दैनिक समय सारणी (Daily Temple Timings)
| समय | दर्शन |
|---|---|
| मंदिर गेट खुलने का सही समय: | भगवान जागेश्वर नाथ मंदिर के कपाट प्रतिदिन सुबह 05:00 बजे भक्तों के लिए खोल दिए जाते हैं। |
| मंदिर बंद होने का समय: | रात को शयन आरती के बाद 09:00 बजे से 10:00 बजे के बीच मंदिर के कपाट बंद होते हैं। |
| मध्याह्न भोग : | दोपहर 12:00 बजे बाबा को राजभोग लगाया जाता है। |
| संध्या महाआरती : | शाम 07:30 बजे मंदिर में भव्य महाआरती होती है। इस समय शंख, नगाड़ों और डमरू की गूंज से पूरा माहौल दिव्य हो जाता है। भक्तों का मानना है कि इस आरती में शामिल होने मात्र से ही मन शांत और आंखें नम हो जाती हैं। |
| महाअभिषेक पूजा : | रात को 10:00 बजे से लेकर रात 03:00 बजे तक विशेष महाअभिषेक और अनुष्ठान किए जाते हैं। |
| विशेष पर्वों पर समय: | सावन सोमवार और महाशिवरात्रि इन पावन अवसरों पर भक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर के कपाट सुबह 04:00 बजे (या कभी-कभी रात में ही) खोल दिए जाते हैं, ताकि दूर-दूर से आए कांवड़िए आसानी से जलाभिषेक कर सकें। |
| विशेष नोट: | दोपहर में 12:00 बजे भगवान को भोग लगाने के समय और सुबह 06:30 बजे विशेष श्रृंगार के समय कुछ मिनटों के लिए दर्शन रोके जाते हैं। |
बांदकपुर में रुकने और खाने-पीने की व्यवस्था
बांदकपुर में भक्तों के रुकने के लिए मंदिर ट्रस्ट और स्थानीय स्तर पर काफी अच्छी और बजट-फ्रेंडली व्यवस्थाएं हैं। वहाँ ठहरने के लिए होटल या धर्मशाला की जानकारी? अगर आप यहाँ रुकना चाहतें हैं तो यह अनुशंसा की जाती है कि आप अपने आवास को अग्रिम रूप से होटल बुक कर लें, विशेष रूप से चरम यात्रा के मौसम या त्योहारों के दौरान।
| ठहरने व्यवस्थाएं | बांदकपुर में रुकने के बेहतरीन विकल्प | कीमत |
|---|---|---|
| बजट-फ्रेंडली | मंदिर ट्रस्ट की धर्मशालाएं: जागेश्वर नाथ मंदिर ट्रस्ट द्वारा संचालित कई धर्मशालाएं हैं। यहाँ आपको बहुत ही कम कीमत पर साफ-सुथरे कमरे और हॉल मिल जाते हैं। | (₹200 से ₹500 प्रतिदिन) |
| मीडियम रेंज | निजी लॉज और होटल्स: मंदिर परिसर के आस-पास कई प्राइवेट लॉज और छोटे होटल्स उपलब्ध हैं। इनमें नॉन-एसी और एसी कमरों की सुविधा मिल जाती है। | (₹600 से ₹1500 के बीच प्रतिदिन) |
| सबसे बेस्ट ऑप्शन | दमोह शहर में रुकना : चूंकि बांदकपुर एक छोटा कस्बा है, इसलिए अगर आपको लग्जरी या वीआईपी होटल्स चाहिए, तो आपको दमोह शहर में रुकना चाहिए। दमोह से बांदकपुर की दूरी महज 15 किलोमीटर है, जहाँ आप ऑटो, बस या टैक्सी से सिर्फ 20-30 मिनट में पहुंच सकते हैं। | दमोह में आपको ₹1000 से ₹3000 तक के अच्छे स्टार कैटेगिरी होटल्स मिल जाएंगे। |
| 🍲 खाने-पीने की व्यवस्था | मंदिर ट्रस्ट की तरफ से भक्तों के लिए निःशुल्क या बहुत ही रियायती दर पर भोजन (प्रसाद) की व्यवस्था रहती है। मंदिर के बाहर शुद्ध शाकाहारी बुंदेली और भारतीय खाना परोसने वाले कई ढाबे और रेस्टोरेंट्स मौजूद हैं। | (₹20 से ₹500 प्रतिदिन) |
बांदकपुर के आस-पास घूमने लायक अन्य जगहें (जैसे दमोह के अन्य स्पॉट)
दमोह के आसपास अन्य घूमने योग्य स्थान? घूमने की पूरी जानकारी आस-पास घूमने की टॉप जगहें ,शिव मंदिर के अलावा, आसपास के अन्य आकर्षणों जैसे प्राकृतिक स्थलों, ऐतिहासिक स्मारकों आदि को देखने के लिए अपनी यात्रा का अधिकतम लाभ उठाने के लिए यात्रा कार्यक्रम की योजना बनाएं।
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