Veerangana Durgavati Tiger Reserve: भारत का 55 वां टाइगर रिज़र्व मध्य प्रदेश का 7 वां नौरादेही और वीरंगना रानी दुर्गावती अभ्यारण को मिला के बना। अब भारत में 57 टाइगर रिजर्व बनने के बाद अब मध्य प्रदेश के पास सबसे ज्यादा 9 टाइगर रिजर्व हो गए हैं। इस लिए मध्य प्रदेश को टाइगर स्टेट भी कहा जाता है। क्योंकि भारत में सबसे ज्यादा 9 टाइगर रिजर्व, 12 राष्ट्रीय उद्यान और 24 वन्यजीव अभयारण्य मध्य प्रदेश के पास ही हैं, और हो भी क्यों न सबसे ज्यादा वन भूमि भी तो मध्य प्रदेश के पास ही हैं।
क्या आप मध्य प्रदेश के एक ऐसे बिल्कुल नए, अनछुए और रहस्यमयी जंगल की सफारी करने वाले पहले पर्यटक बनना चाहते हैं जहाँ अफ़्रीकी चीतों के स्वागत की तैयारी चल रही हो, जहाँ एक ओर बुंदेलखंड विशालकाय भू भाग का प्राकृतिक नजारा और दूसरी ओर महान और आर्थिक रूप से संपन्न गोंडवाना साम्राज्यके ऐतिहासिक किलों के खंडहर हों। आज भी इस जगह में सोने से बने आभूषण और वस्तुये पाई जाती हे और मिले भी क्यों न इस जंगल में , आज भी कही परस पत्थर युही कई पड़ा हुआ है, इसी घने जंगलों के बीच से बहती ब्यारमा नदी का जादुई नज़ारा हो? यदि हाँ, तो मध्य प्रदेश के दमोह, सागर और नरसिंहपुर जिलों में फैला वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (Veerangana Durgavati Tiger Reserve) आपकी बकेट लिस्ट में सबसे ऊपर होना चाहिए।
“जब ज़िद पे आ गई पार्वती” फिल्म हनुमान अंश का एक लोकप्रिय भजन है इसी क्षेत्र बुंदेली लोक शैली में गाया है। जहाँ यह नौरादेही वन्यजीव अभ्यारण्य और वीरांगना दुर्गावती अभ्यारण्य को मिलाकर बनाए गए इस विशाल टाइगर रिजर्व में प्रकृति का एक अलग ही रोमांच देखने को मिलता है। आज की इस दोस्ताना गाइड में मैं आपको घर बैठे इस नए टाइगर रिजर्व की ऑनलाइन सफारी बुकिंग, भैंसाघाट निदान जलप्रपात और इस ट्रिप के लिए आधुनिक टेक गैजेट्स की पूरी लाइव जानकारी देने जा रहा हूँ।
वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व का गठन और नौरादेही का सच (The Formation & History)
इस नए टाइगर रिजर्व का नाम गोंडवाना साम्राज्य की महान और बहादुर शासक रानी दुर्गावती के नाम पर रखा गया है। इसका इतिहास और गठन वन्यजीव प्रेमियों के लिए बेहद दिलचस्प है। केन-बेतवा नदी लिंक परियोजना (Ken-Betwa River Link Project) के कारण जब पन्ना टाइगर रिजर्व का एक बड़ा हिस्सा पानी में डूबने की कगार पर आया, तो वन विभाग ने बाघों के प्राकृतिक रहवास को बनाए रखने के लिए इस नए रिजर्व का गठन किया।

यहाँ का सबसे बड़ा कड़वा सच और रोमांच यह है कि इसके नौरादेही (Nauradehi) वाले हिस्से को भारत में चीतों के दूसरे घर (Second Home for African Cheetahs) के रूप में विकसित किया जा रहा है। कान्हा और बांधवगढ़ से लाकर छोड़े गए बाघ और बाघिन (जैसे किशन और राधा) आज बुंदेलखंड के इस नए घने जंगल में अपना कुनबा बढ़ा रहे हैं। इसके साथ ही, यहाँ आपको तेंदुए, भेड़िए (Indian Wolf), भालू और नीलगायों का विशाल साम्राज्य देखने को मिलता है।
प्रमुख आकर्षण, ज़ोन और पास के पर्यटन स्थल (Best Places & Safari Gates)
वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व को मुख्य रूप से नौरादेही और दमोह के द्वारों से एक्सप्लोर किया जा सकता है:
- नौरादेही सफारी ज़ोन (सागर-दमोह मार्ग): यह इस रिजर्व का सबसे बड़ा और मुख्य वन्यजीव क्षेत्र है। यहाँ के शुष्क पर्णपाती जंगलों और घास के मैदानों (Cheetah Enclosures) के बीच सफारी जिप्सी में घूमना आपको अफ्रीका के सवाना जैसा एहसास कराता है।
- सिंगौरगढ़ किला और निदान कुंड (दमोह स्पेशल): दमोह के पास स्थित ऐतिहासिक सिंगौरगढ़ किला (Singorgarh Fort) रानी दुर्गावती की वीरता का गवाह है। इसके पास ही स्थित भैंसाघाट निदान जलप्रपात (Bhainsaghat Nidan Waterfall) ऊँची चट्टानों से गिरता हुआ पानी और सुंदर घाटियाँ ट्रेकिंग के शौकीनों की पहली पसंद हैं, जहाँ से पूरे रिज़र्व का विहंगम नज़ारा दिखता है।
ऑनलाइन सफारी टिकट बुकिंग और खर्च की पूरी जानकारी
चूंकि यह रिज़र्व हाल ही में लाइव हुआ है, त्योहारों (Navratri & Diwali) और विंटर वेकेशंस में जबलपुर, सागर और भोपाल के पर्यटकों की बुकिंग्स तेजी से बढ़ रही हैं। किसी भी दलाल या फेक वेबसाइट के चक्कर में न पड़ें, आप सीधे मध्य प्रदेश सरकार के आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल [MP Online Wildlife Booking Portal] पर जाकर एडवांस में अपना सफारी परमिट सुरक्षित कर सकते हैं।
- जिप्सी सफारी का कुल खर्च: इस नए टाइगर रिजर्व में सफारी का खर्च अन्य स्थापित पार्कों की तुलना में थोड़ा कम और बेहद बजट-फ्रेंडली है। फुल जिप्सी सफारी (सरकारी परमिट + अनिवार्य गाइड फीस + जिप्सी का किराया) मिलाकर कुल खर्च लगभग ₹3,800 से ₹4,500 के बीच बैठता है।
कहाँ ठहरें? दमोह और सागर के सुंदर बजट होटल्स और ईको-रिसॉर्ट्स
वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व और दमोह के आसपास रुकने के लिए बहुत ही शांत और पॉकेट-फ्रेंडली दोस्ताना ऑप्शन्स उपलब्ध हैं:
- बजट और भरोसेमंद विकल्प: नौरादेही और पारसिली की तर्ज पर वन विभाग का [Forest Rest House Nauradehi] सीधे जंगल के बीच रुकने का सबसे रोमांचक साधन है। इसके अलावा दमोह शहर के नजदीक स्थित स्थानीय होटल्स और [MPT Resorts] की गाइड्स के माध्यम से आप बजट-फ्रेंडली स्टे पा सकते हैं।
बुंदेलखंड सफारी के लिए विशिष्ट स्मार्ट टेक गैजेट्स (Special Tech Travel Gear Checklist)
इस नए और अनछुए जंगल के सुदूर रास्तों पर अपनी सुरक्षा, व्लॉगिंग और कनेक्टिविटी को मजबूत रखने के लिए इन विशिष्ट उपकरणों को साथ रखें:
- क्रम 1: [GoPro HERO12 Black Action Camera] — भैंसाघाट के पथरीले रास्तों, निदान कुंड की ट्रेकिंग और खुली जिप्सी सफारी के दौरान बिना किसी कंपन के स्मूथ 4K वीडियो और लाइव सफारी रील्स बनाने के लिए इस कॉम्पैक्ट वाटरप्रूफ कैमरा को अपने साथ रखें।
- क्रम 2: [Apple AirTag] या [Samsung SmartTag2] — नई जगहों और भीड़भाड़ वाले सफारी रिसेप्शन सेंटर पर अपने महंगे कैमरों के बैग, ड्रोन किट या सूटकेस की सुरक्षा के लिए यह छोटा स्मार्ट जीपीएस ट्रैकर बैग के अंदर ज़रूर छुपाकर रखें।
- क्रम 3: [TP-Link 4G LTE Portable Pocket Wi-Fi Router] — बुंदेलखंड के इन सुदूर ग्रामीण और जंगली इलाकों में मोबाइल टावर बहुत कम होते हैं। इस पोर्टेबल राउटर में लोकल सिम डालकर आप अपने पूरे ग्रुप के लिए एक मजबूत वाई-फाई ज़ोन बना सकते हैं, जिससे आपकी लाइव ब्लॉगिंग और रील्स अपलोडिंग कभी न रुके।
- क्रम 4: [Nikon Prostaff P7 10×42 Waterproof Binocular] — सिंगौरगढ़ किले की प्राचीन प्राचीर से दूर मैदानों में घूमते बाघों या पेड़ों पर बैठे दुर्लभ पक्षियों को बिल्कुल साफ-साफ लाइव देखने के लिए यह वॉटरप्रूफ और फॉग-प्रूफ दूरबीन आपके गले में होनी ही चाहिए।
क्या आप मध्य प्रदेश के इस सबसे नए और ऐतिहासिक वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व को एक्सप्लोर करने वाले पहले एडवेंचरर बनने के लिए तैयार हैं? आपको भैंसाघाट का वॉटरफॉल देखना ज्यादा पसंद आएगा या जिप्सी सफारी? नीचे कमेंट बॉक्स में हमें जरूर बताएं और aryango.com के इस सफर को सब्सक्राइब करना न भूलें!
भारत का 55 वां और मध्य प्रदेश के 9 टाइगर रिजर्व के बारे में…
नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य और रानी दुर्गावती वन्यजीव अभयारण्य को मिलकर वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व के रूप में आज पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। इस टाइगर रिजर्व को नौरादेही एवं रानी दुर्गावती वन्यजीव अभयारण्य के नाम से जाना जाता है। नौरादेही और रानी दुर्गावती वन्यजीव अभयारण्य, नरसिंहपुर, दमोह और सागर जिले को का भारत 55 वां टाइगर रिजर्व के रूप में प्राप्त हुआ हैं।
यह अभ्यारण सुन्दर मनमोहक द्रश्य के लिए भी जाना जाता हैं केन-बेतवा परियोजना से जुड़ा होने के कारण यह पन्ना टाइगर रिजर्व से 900 वर्ग किमी के क्षेत्र को संभावित जलमग्न होने के कारण इसे ध्यान में रखते हुए, नौरादेही मध्य प्रदेश राज्य में बाघों के लिए एक नया आवास प्रदान किया गया है।


भारत का 55 वां व मध्य प्रदेश का 7 वां टाइगर रिजर्व
नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य और रानी दुर्गावती वन्यजीव अभयारण्य टाइगर रिजर्व की स्थापना 19 जून वर्ष 2024 में संपन्न हुई जो दमोह जिले के सिंगौरगढ़ में इसकी लंबाई तकरीबन 1035 वर्ग किमी के क्षेत्र में फैला हुआ है। इसके बाद पन्ना का केन अभयारण्य और निवाड़ी का ओरछा अभयारण्य 45-45 किमी के हैं। जबकि रानी दुर्गावती अभयारण्य सबसे छोटा होने के बाद भी खासियतों से भरा है। यह पहाड़ों पर बसा है और यहां सबसे अधिक वन्य जीव पाए जाते हैं।
देश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व जहाँ होगा टाइगरों का राज
नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा अभ्यारण्य है यह लगभग 1,197 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। ऊपरी विंध्य पर्वतमाला का हिस्सा बनने वाले पठार पर स्थित दमोह जिले के वीरांगना दुर्गावती अभ्यारण्य से जुड़ा हुआ है। डेक्कन प्रायद्वीप के जैवभौगोलिक क्षेत्र से लेकर पूर्व में यह बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान तक फैला हुआ है।
Nauradehi Wildlife Sanctuary Madhya Pradesh: वर्तमान में मुख्य रूप से मध्य प्रदेश के मध्य में 3 प्रमुख जिलों सागर, नरसिंहपुर और दमोह जिले के मध्य में स्थित है यह अभ्यारण का पन्ना बाघ अभयारण्य के साथ वन्यजीव मिलता-जुलता कनेक्शन है यह भूमि तुलनात्मक रूप से यह अधिक समतल स्तर पर है। इसलिए इसका आवास स्थान और जनसांख्यिकी तक पन्ना के जंगल के समान मिलता प्रतीत होता है।
नौरादेही वन की वनस्पति कान्हा राष्ट्रीय उद्यान या बांधवगढ़ से भिन्न है, जो किसी तरह पन्ना बाघ अभयारण्य से मेल खाती है। नौरादेही वन मूल रूप से प्रकृति का शुष्क पर्णपाती वाला चट्टानी क्षेत्र है यहाँ पर जानवरों का सुन्दर द्रश्य देखने को मिलता हैं। यह नेचर फोटोग्राफी के साथ ही सफारी के अनुभव को यादगार बना देता हैं।
वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में पाये जाने वाले वन्यजीव
अभयारण्य में टाइगर, नीलगाय, सांभर, चीतल और कृष्णमृग के अलावा 200 से ज्यादा पक्षियों की प्रजातियां भी हैं। गणना में गिद्धों की संख्या 141 से ज्यादा मिली है। चारों और घाना जंगल होने के कारण यहाँ पर विभिन्न प्रकार के जीव-जन्तु दिखाई पड़ते हैं बीच जंगल में तालाब होने के कारण पशु-पक्षियों व जीव-जंतुओं ने इसे अपना आवास का स्थान बना लिया हैं। सुनने में यह भी आता हैं, कि तालाब विशाल होने के कारण 2 घडियाल भी मौजूद।

रानी दुर्गावती वन्यजीव अभयारण्य दमोह जिले की सगौनी क्षेत्र और सिंग्रामपुर क्षेत्र से होते हुए यह तेजगढ़ क्षेत्र तक पहुंचा था। आगे चलकर यह रेंजों को तेंदूखेड़ा क्षेत्र तक जोड़ दिया जाए तो पूरा अभयारण्य 205 किमी का हो जाता है। अभ्यारण में विभिन्न प्रकार के यहां के प्राचीन पेढों की प्रजतिन्याँ हैं।
टाइगर रिजर्व के साथ यह क्षेत्र भी पर्यटकों को आकर्षित करते हैं
रानी दुर्गावती वन्यजीव अभयारण्य सिंगौरगढ़ के इस क्षेत्र में भैंसाघाट, निदानकुंड, नजारा व्यू प्वाइंट सहित अनेक पर्यटक स्थल भी मौजूद हैं जो देशी-विदेशी पर्यटकों को अपनी ओर तेजीसे आकर्षित करते हैं।
इन सभी का एक नया प्रमुख स्थल सिंगौरगढ़ अभयारण्य है यहाँ पर व्यू टावर लगा हुआ है जो समुद्र तल से एक हजार वर्ग मीटर की ऊंचाई पर विंध्यांचल पर्वत श्रंखला पर बना है। जिससे आप वहाँ का नजारा व्यू देख सकते हैं।
आस-पास घुमने लायक जगह
वीरांगना रानी दुर्गावती सिंगौरगढ़ किला
सिंगौरगढ़ दुर्ग गोंडवाना साम्राज्य के स्वर्णिम युग के गौरवान्वित किलों में से एक एतिहासिक किला हैं। यह रानी दुर्गावती के शौर्य और गौरव का प्रतीक है। यह किला भारतीय इतिहास के स्वर्णिम पन्नो में दर्ज है। सिंगौरगढ़ किला भारत के गौरवशाली इतिहास को समेटे हुए प्राकृतिक नजारों के बीच में अपने अतीत का विख्यान करते हुए आज एक खंडहर के रूप में खड़ा हुआ है। और पढ़ें …
वीरांगना रानी दुर्गावती वन्यजीव अभयारण्य दमोह
इस अभयारण्य में देखने लायक दर्जनों प्रसिद्ध और चिन्हित स्थान मौजूद हैं जो एक दिन में पर्यटकों को देख पाना मुश्किल हैं। और पढ़ें …
खुबसूरत वादियों भरा विशालकाय जलप्रपात भैसा घाट
भैसाघाट घाट निदान जलप्रपात दमोह, मध्य प्रदेश, भारत में स्थित एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है। यह दमोह के घाट क्षेत्र में स्थित एक सुरम्य झरना है, घुमावदार भैसाघाट पहाड़ी की चड़ाई और अपनी प्राकृतिक सुंदरता के शांत वातावरण के लिए जाना जाता है। झरना हरे-भरे जंगलों और पहाड़ियों से घिरा हुआ है, जो इसे पिकनिक, लंबी पैदल यात्रा और अन्य बाहरी गतिविधियों के लिए एक आदर्श स्थान बनाता है। और पढ़ें …

जबलपुर के दो खूबसूरत जलप्रपात
निदान जलप्रपात 120 फीट से भी अधिक की ऊंचाई से गिरने वाले जबलपुर के दो प्रसिद्ध वर्षति झरने हैं, जो जबलपुर जिले के कंटगी नगर में, हरी-भरी हरियाली और घने जंगलों के बीच स्थित हैं। निदान जलप्रपात जबलपुर से लगभग 40 से 45 किमी पर जबलपुर-दमोह हाईवे रोड से करीब 2 किलोमीटर हैं। और पढ़ें …
नोहलेश्वर शिव मंदिर नोहटा दमोह
नोहटा शिव मंदिर (नोहलेश्वर शिव मंदिर) बहुत खूबसूरत नक्काशियों से परिपूर्ण कल्चुरी काल में निर्मित एक बहुत ही आकर्षित मंदिर है। इसका निमार्ण 905 से 1000 ईस्वी के आस पास 10वी शताब्दी में हुआ है। यह कला का एक अनुपम व बेजोड़ नमूने की कृति है। और पढ़ें …
श्री जागेश्वर धाम बांदकपुर दमोह
बांदकपुर भारत के मध्य प्रदेश राज्य के छोटे से जिले दमोह से 18 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक छोटा सा क़स्बा है, लेकिन भगवान शिव को समर्पित प्रसिद्ध मंदिर, जागेश्वर नाथ मंदिर के लिए जाना जाता है। भगवान शिव शंकर की नगरी बांदकपुर (Bandakpur Damoh ) तीर्थ स्थलों में से एक रहस्यमयी शिव मंदिर है। और पढ़ें …
बड़े बाबा का दिव्य धार्मिक स्थल कुण्डलपुर
कुण्डलपुर जैनों का एक सिद्ध क्षेत्र है जहाँ से श्रीधर केवली मोक्ष गये है जो दमोह से 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह एक प्रमुख तीर्थ जैन स्थल है। यहाँ तीर्थकर ऋषभदेव की एक विशाल प्रतिमा विराजमान है। कुंडलपुर शहर में 60 से अधिक जैन मंदिरों तीर्थ स्थल मौजूद है। कुंडलपुर में सबसे प्रसिद्ध मंदिर श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र कुंडलपुर मंदिर है, जो जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ को समर्पित है। और पढ़ें …
नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य
यह लगभग 645 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र को कवर करता है, और बाघों, तेंदुओं, सुस्त भालू, नीलगाय, चिंकारा, जंगली सूअर और पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों सहित विभिन्न प्रकार की वनस्पतियों और जीवों का घर है। और पढ़ें …
इस नए टाइगर रिजर्व को नौरादेही और दुर्गावती सेंचुरी को मिलाकर बनाया गया है। यदि आप नौरादेही क्षेत्र की सफारी और चीता प्रोजेक्ट के बारे में विस्तार से पढ़ना चाहते हैं, तो हमारी 👉 [नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य गाइड] ज़रूर पढ़ें।”
वीरांगना रानी दुर्गावती वन्यजीव अभयारण्य दमोह मध्य प्रदेश
Veerangana Rani Durgavati Wildlife Sanctuary Madhya Pradesh : वीरांगना रानी दुर्गावती वन्यजीव अभयारण्य दमोह मध्य प्रदेश दमोह के लिए सौभाग की बात हैं की आज पर्यटन की द्रष्टी से इस अभयारण्य में पर्यटकों की वहुत ही ज्यदा रूचि हैं। हो भी क्यों न इस अभयारण्य में देखने लायक दर्जनों प्रसिद्ध और चिन्हित स्थान मौजूद हैं जो एक दिन में पर्यटकों को देख पाना मुश्किल हैं। इस ब्लॉग में हम आपकों कुछ प्रसिद्ध स्थानों की सूची वीरांगना रानी दुर्गावती वन्यजीव अभयारण्य दमोह मध्य प्रदेश दमोह दे रहे हैं जो इस प्रकार हैं।
भैसाघाट पहाड़ी की चड़ाई
यह दमोह जिले की प्राकर्तिक नजारा से भरपूर सबसे खूबसूरत स्थान है यहाँ पर मौजूद है नजारा पॉइंट, वीरांगना रानी दुर्गावती का सिंगौरगढ़किला, रानी दुर्गावती अभ्यारण्य एवं प्राक्रतिक वादियों से भरपूर लहराती बलखाती भैसाघाट की पहाड़ी चड़ाई पर चढ़ती हुई खतरनाक सड़क जो डरावनी और सुन्दर दोनों है।

नज़ारा व्यू पॉइंट सिंगौरगढ़ दमोह
नजारा व्यू प्वाइंट देखने के लिए आप दमोह जिले में स्थित एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। यह नजारा व्यू प्वाइंट रानी दुर्गावती अभ्यारण का सबसे ऊंचा स्थान है। इस जगह के व्यूप्वाइंट से आपको पूरे रानी दुर्गावती अभ्यारण का पूरा सुंदर दृश्य देख सकते हैं। जहाँ से आप वन्यजीव अभ्यारण की सुन्दर वादियों का सारा नजारा देख सकते हैं। इसकी ऊचाई करीब 300 फिट हैं।

रानी दुर्गावती सिंगौरगढ़ किला हाथी दरवाजा दमोह
सिंगौर गढ़ में स्थित रानी दुर्गावती का किला दमोह जिले के सबसे पुराने किलों में एक माना जाता हैं। सिंगौर किला रानी दुर्गावती अभ्यारण्य में स्थित है। जिसके चारों ओर घने जंगल है। किले में पहुंचने के लिए आपको पैदल चलकर जाना पड़ेगा। जोकि विशाल क्षेत्र में फैला हुआ हैं।

रानी दुर्गावती महल सिंगौरगढ़ दमोह
रानी दुर्गावती महल सिंगौरगढ़ दमोह, जिसे रानी महल के नाम से भी जाना जाता हैं। यह पहाड़ी की कठिन चढ़ाई के बाद जा कर आपकों देखने को मिलेगा। जब भी आप इस रानी महल को देखने को जांए तो साथ में पानी की वाटल साथ जरुर ले जाएँ क्योंकि उचाई पर आपकों वहुत ही जोरों की प्यास लगेगी परन्तु पिने का पानी ऊपर उपलब्ध नहीं हैं। इस महल में लगभग 33 से भी ज्यादा कमरें थें।

सिंगौरगढ़ की मढिया दमोह
सिंगौर गढ़ की मढिया बहुत ही पुरानी है जिसे देखने के लिए दूर-दूर से बड़ी संख्या में लोग इस मढिया को देखने के लिए आते हैं। जो प्राचीनकाल की मानी जाती हैं यदि आप यहाँ आकर देखते हैं तो आप खुबसूरत द्रश्य देखेंगे जिसके चारों ओर हरयाली भरा मैदान फैला हुआ हैं।

सिंगौरगढ़ का तालाब दमोह

सिंगौरगढ़ किले के पास एक बड़ा तालाब भी बना हुआ हैं। तालाब के हर तरफ हरयाली की सुन्दरता होने के कारण यह हर किसी का मन प्रसन्न हो जाता हैं। इस तालाब की एक ओर खास बात यह है की तालाब का पानी कभी भी खत्म नहीं होता हैं। इस तालाब के बारे में सुनने में यह भी आता है की इस तालाब में बड़े-बड़े मगरमच्छ भी मौजूद है।
रानी दुर्गावती वाइल्ड लाइफ सेंचुरी दमोह

रानी दुर्गावती वाइल्ड लाइफ सेंचुरी दमोह में आपकों बंदर, भालू , लोमड़ी, जंगली कुत्ता, सियार, भेड़िया, मोर, मगरमच्छ, नील गाय आदि देखने को मिलेंगे। साथ ही छोटा चक्कर, बड़ा चक्कर, रेस्ट हाउस आदि भी आपकों देखने को मोलेंगे।
रानी दुर्गावती पार्क दमोह

रानी दुर्गावती पार्क सिंग्रामपुर दमोह नाम के गाँव में मौजूद हैं, यह आज भी विकास के नाम पर मोहताज हैं, जो वीरांगना रानी दुर्गावती स्मारक का सही ढंग से संरक्षण नहीं हो पा रहा हैं साथ ही आज भी स्थानीय लोंगों की इस में कोई रूचि नहीं दिखती हैं।
निदान कुंड जलप्रपात भैसाघाट दमोह

रानी दुर्गावती वाइल्ड लाइफ सेंचुरी वॉच टावर दमोह

गिरी दर्शन वॉच टावर दमोह : Giridarshan Watch Tower Damoh
गिरी दर्शन वाच टावर रानी दुर्गावती अभ्यारण्य के अंदर जबलपुर दमोह हाईवे रोड पर स्थित है। यह हाईवे रोड से अन्दर की तरफ करीब 1 किलोमीटर की दूरी पर हैं । आपकों यहां पुहचने के के लिए पक्की सड़क है। गिरी दर्शन वॉच टावर में आप अपनी दोपहिया और चार पहिया वाहन से भी पुहँच सकते हैं। गिरी दर्शन वॉच टावर के चारों ओर का दृश्य प्राकृतिक खूबसूरती से भरपूर है। बरसात के समय यह दमोह शहर की स्वर्ग के समान बहुत खूबसूरत जगह लगती हैं
मध्य प्रदेश के अन्य नेशनल पार्क












National Parks
Kanha Tiger Reserve
Bandhavgarh Tiger Reserve
Panna Tiger Reserve
Pench Tiger Reserve
Satpura Tiger Reserve
Sanjay-Dubri Tiger Reserve
Madhav National Park
Vanvihar National Park
Fossil National Park
Dinasour Fossil National Park
“धर्मेंद्र सिंह आर्यन गो में सीनियर डिजिटल कंटेंट राइटर कार्यरत है। उम्र 40 साल है, शैक्षिणिक योग्यता दर्शनशास्त्र में एम.फिल है, मुझे किताबें पढ़ने, लेखन और यात्रा करने का शौक है, मेरा आहार शुद्ध शाकाहारी भोजन है। मुझे भारत के छिपे हुए पर्यटक स्थलों की खोज करने और उन पर लेख लिखने का गहरा जुनून है।
पिछले 18 वर्षों से, मैंने एक ट्रैवल गाइड के रूप में अमूल्य अनुभव एकत्र किए हैं, जिन्हें मैं अब अपने ब्लॉग के माध्यम से गर्व से साझा करता हूं। मेरा लक्ष्य आपको भारत के सबसे आकर्षक यात्रा स्थलों के बारे में आकर्षक और व्यावहारिक जानकारी प्रदान करना है, साथ ही अन्य उपयोगी ज्ञान जो आपकी यात्रा को बेहतर बनाता है।
मैंने एक ब्लॉगर, YouTuber और डिजिटल मार्केटर के रूप में अपनी भूमिकाएँ निभाई हैं। मैं प्रकृति की गोद में बसे एक छोटे से गाँव में अपने शांतिपूर्ण जीवन से प्रेरणा लेता हूँ। मेरी यात्रा दृढ़ता और समर्पण की रही है, क्योंकि मैंने अपने सपनों को वास्तविकता में बदलने के लिए कड़ी मेहनत की है। अपने ब्लॉग के माध्यम से, मैं अपने द्वारा अर्जित ज्ञान को साझा करना चाहता हूँ और दूसरों को रोमांचकारी यात्रा करने के लिए प्रेरित करना चाहता हूँ।“







