Suhajni Wali Mata Majholi

जबलपुर का वो रहस्यमयी जगह जहाँ देवी करती हैं जीवंत चमत्कार

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मध्यप्रदेश के जबलपुर ज़िले की मझौली तहसील में स्थित सुहजनी वाली माता का मंदिर सिर्फ़ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्थाओं का केंद्र बन चूका है। शारदीय नवरात्रि जो 29 सितम्बर से 3 अक्टूबर 2025 में यहाँ लाखों श्रद्धालु माँ के दर्शन के लिए भरी भीड़ के साथ उमड़ पड़ते हैं।

सुहजनी की विशेष बात यह है कि जिन भक्तों की मनोकामना पूरी हो जाती है, वे माता को चाँदी के छत्र चढ़ाते हैं। यही कारण है कि नवरात्रि में पूरा मंदिर परिसर चाँदी के हजारों छत्रों से जगमगाता हुआ नज़र आता है।

जब मैं नवरात्रि में सुहजनी देवी के दर्शन करने देवी के दरबार में पहुँचा, तो मेरे भीतर एक भय और नकारात्मकता थी की मेरी वेबसाइट अब AI के समय चलेगी की नहीं पर जब मैंने देवी की मूर्ति को सामने देखा तो तुरंत ही मेरा मन से डर मिटने लगा और एक अद्भुत शांति का अनुभव हुआ। यहाँ आकर मेरा आस्था और आत्मिक शक्ति का जीवन में सकारात्मक ऊर्जा एक गहरा अनुभव हुआ। यही वजह है कि लोग नवरात्रि में माता रानी के दर्शन कर आशीर्वाद लेने अवश्य जाते हैं।

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अद्वितीय परंपरा – कई पीढ़ियों से बस एक ही स्वरूप माता का चला आ रहा है

सुहजनी वाली माता की एक और खासियत है कि यहाँ देवी की प्रतिमा पीढ़ी दर पीढ़ी एक ही स्वरूप में स्थापित की जाती है। मान्यता है कि मंदिर में माँ शक्ति, लक्ष्मी और सरस्वती – तीनों रूपों में साक्षात विराजमान रहती हैं। इसीलिए यह स्थल भक्तों के बीच “जीवंत चमत्कारों का धाम” माना जाता है।

सुहजनी वाली माता: आस्था और चमत्कारों का संगम, स्थापना और भव्य आयोजन

हर वर्ष नवरात्र की सप्तमी को माँ की स्थापना होती है। शाम 7:30 बजे शुरू होने वाला यह आयोजन बेहद भव्य और भक्तिमय माहौल में सम्पन्न होता है। बैंड-बाजों, ढोल-नगाड़ों और भक्तों के जयकारों से पूरा वातावरण गूंज उठता है। इस दौरान हज़ारों लोग यहाँ शामिल होकर माता काली, लक्ष्मी और सरस्वती की आराधना करते हैं।

जल चढ़ाने की परंपरा और आरती

नवरात्र के दिनों में सुबह 4 बजे से ही भक्त माँ के दरबार में पहुँच जाते हैं। दूर-दराज़ गाँवों से लोग पैदल आकर माता को जल चढ़ाते हैं। मंदिर परिसर और आसपास की गलियाँ भक्तों से भरी रहती हैं। जल अर्पण के बाद भक्त “पंडा बाबा की मढ़िया” में जाकर जिवारों और कलश के दर्शन करते हैं।

Suhajni Wali Devi

सुहजनी वाली माता की स्थापना व जिवारों और दशहरे की भव्यता

सुहजनी में नवरात्र का सबसे बड़ा आकर्षण है “जिवारों की परंपरा”। यहाँ पर हज़ारों कलश सजाए जाते हैं, जिन्हें नवरात्र के नवमी और दशहरे पर विशेष जुलूस में निकाला जाता है। खासतौर पर ग्यारस की रात को मनाया जाने वाला सुहजनी का दशहरा जबलपुर ज़िले में बेहद लोकप्रिय है। बैंड-बाजों और विशाल जुलूसों के साथ माता के भक्त झंडा चढ़ाने पहुँचते हैं। यह नज़ारा जीवनभर याद रहने वाला अनुभव देता है।

सुहजनी में नवरात्री की सप्तमी को ही क्या होती हैं माता की स्थापना

सभी जगह आप देखेगे की नवरात्रि के प्रथम दिन ही माता की स्थापना हो जीती है, परन्तु सुहजनी में सप्तमी को ही क्यां होती हैं? इसका मुख्य कारण भी अद्वितीय परंपरा जिसमें माता की मूर्ति कही से खरीद कर नहीं लायी जाती अपितु इसी गाँव की एक खास जगह की मिट्टी को लगर बैठकी के दिन से सुरुबत होती हैं।

यहाँ की मान्यता हैं की माँ के दिव्य स्वरुप बनाने के लिए विशेष साधना की जरुरत होती हैं। माता की मूर्ति का निर्माण शारदीय नवरात्री के प्रथम दिवस से प्रारंभ होता हैं, जो सप्तमी तक स्थापना के पहले तक चलता हैं जो उसी इस्थान पर ही होता हैं।

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Suhajni mata majholi
Suhajni Wali Mata mandir majholi

Suhajni Mata Mandir Majholi Jabalpur
सुहजनी वाली माता मंदिर मझौली जबलपुर

विसर्जन और भंडारा

नवरात्र के समापन पर माता का भव्य जलसा और विसर्जन होता है। पूरी रात भजन-कीर्तन चलते हैं और सुबह माँ का जलसा निकलने के बाद पास के तालाब में विसर्जन किया जाता है। इस दौरान वातावरण भक्तिमय और रोमांचक हो उठता है। वहीं, भक्तों के लिए भंडारे की भी विशेष व्यवस्था होती है।

सुहजनी वाली माता के दर्शन और आरती

नवरात्रि के समय में यहाँ पर बैठकी से लेकर ग्यारस तक लोग मैया सुहजनी वाली माता के दरवार में दूर-दूर के गाँवों से लोग सुबह 4: 00 बजे से पैदल चल कर मैयाजी को जल चढ़ाने आते है यहाँ जल चढ़ाने वालों की लम्बी कातार होती है।इस स्थान में आने वाले सभी रास्ते में लोगों की भारी भीड़ होती हैं।

माँ के दर्शन करने के बाद माँ स्थान के बाजू से अन्दर चलकर पंडा बाबा की की मढिया है। जहाँ से माँ के जिवारे शुरू होते है जहाँ पर जिवारों की संख्या बहुत अधिक होती है जहाँ दूर-दूर से लोग आते है।

Suhaji Wali mata ke Jivare
सुहजनी के जिवारे

नवरात के पहले दिन से ही लोग यहाँ पर जिवारे विवाने के लिए आते है। जहाँ जिवारों के कलशों की संख्या हजार के ऊपर होती है जो कि नवरात के नौं वे दिन निकाले जाते हैं।

दशहरे के समय में अपनी मनोकामना पूरी होने पर लोग दूर-दूर से माँ के दरवार में बैंड बाजों के साथ में बड़े-बड़े जुलूसों को लेकर झंडा चढानेआते है। सुहजनी का दशहरा जबलपुर जिले में बहुत ही लोकप्रिय और प्रसिद्ध है। सुहजनी का दशहरा नवरात के ग्यारस को बड़े धूम-धाम से मनाया जाता हैं।

सुहजनी का दशहरा ग्यारस की रात बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता हैं, और जीवन भर स्मरणीय और रोमांचक रहेगा। इस समय में आकार आप इस विशाल दशहरे आनंद ले सकते हैं। क्योंकि यहाँ दशहरा बहुत ही खास होता है जब भी आपको समय मिले यहाँ पर आना न भूले।

Durga Dham Suhajni Mata
Durga Dham Suhajni Mata

नो पार्किंग जोन : Suhajni Mata Mandir Majholi Jabalpur

नवरात के सप्तमी से आप माँ के दर्शन के लिए सुहजनी आ सकते हैं, लेकिन अधिक भीड़ आने के कारण सुबह 10.00 am के बाद अगर आप मझौली मार्ग से आते हैं तो सुहजनी गावं से 2 km के पहले ही आपको अपनी गाड़ी पार्किंग में खड़ी करनी होगी। अगर आप सुबह 10.00 am के पहले दर्शन को आते हैं तो आपको मंदिर के बहुत पास तक आप अपनी गाड़ी से आसानी जा सकते हैं।

सुहजनी में मौजूद अन्य स्थल

सुहजनी का एक अपना धार्मिक महत्त्व है। सुहजनी माता मन्नत पूरी करने वाली देवी दरवार के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ पर लोग अपनी मन की मुरादों को लेकर माता के दरवार में आते है। सुहजनी में माता रानी के मंदिर के अलावा और भी अन्य दार्शनिक स्थल मौजूद हैं। जैसे

  1. यज्ञशाला सुहजनी :
  2. माता दुर्गा मंदिर सुहजनी
  3. माता महाकाली मंदिर सुहजनी
Suhajni Dham
सुहजनी धाम

क्या आपने कभी लगभग 1 मीटर के आसपास होता (3 फिट) तक पंखों के फैलाव वाले बड़े चमगादड़ को देखा जो, बहुत ही बड़े आकार के चमगादड़ पाये जाते हें जिनके पंखों के फैलाव का आकार है। जो विशेष रूप से बहुत ही कम देखने को मिलतें हैं। यदि नहीं तो शायद आप यह जानकर अचंभित हो जाओगे की यज्ञशाला सुहजनी में एक पीपल के पेड़ के पास बहुत सारी ऐसी चमगादड़ देखने को मिल जाएँगी।

जिनका साइज़ लगभग एक बड़े बाज़ के बराबर होता है। हर जगह कुछ ऐसे खास स्थान होते है, जो बहुत ही कम लोगो को पता होता है। यहाँ पर एक शनि भगवान का भी मंदिर हैं। जो बहुत ही कम लोगो ने देखा है।

Yagya Shala Suhajni Devi
यज्ञ शाला सुहजनी देवी

माता महाकाली मंदिर सुहजनी

सुहजनी के मुख्य मंदिर से थोड़ी दूर पर माता महाकाली का मंदिर स्थित है। जिसमे माता महाकाली की एक बहुत ही सुंदर मूर्ति स्थापित है। जिसे देख ऐसा प्रतीत होता है मानो सामने स्वयं माता महाकाली प्रकट हुई है। लोग यहाँ पर माता रानी का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए आते हैं यहाँ पर बहुत शांत वातावरण होता है।

Suhaji Ki Maha Kali
माँ काली सुहजनी

माता दुर्गा मंदिर सुहजनी

Durga Mandir Suhajni
दुर्गा मंदिर सुहजनी

मुख्य मंदिर से लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर एक पहाड़ी पर बहुत ही खुबसूरत मंदिर बना हुआ है। जिसमे माँ दुर्गा जी की मूर्ति स्थापित है। यह मंदिर देखने में मन मनमोहक प्रतीत होता है। यह पूरा मंदिर परिसर में बहुत ही अच्छा लगता है। इस पहाड़ी से देखने पर आसपास के खेत खलियानों और प्रकृति के अनुपम द्रश्य दिखाई देता है।

Gram suhajni Majholi
Maa Suhajni Wali Suhajni

वहीं से थोड़ी दूर सीढ़ियों से ऊपर चढ़कर माँ दुर्गा जी का मन्दिर है। जहाँ पर लोग एक साथ बैठकर भक्ति के साथ भजन कीर्तन करते है। वहाँ का हम बहुत ही शानदार नजारा देखते है । जहाँ से हम चारो और का नजारा देखते हुए आनंद लेते है। जिसमें हरे भरे खेत तालाब देख कर मन को बहुत ही सुकून मिलता हैं। आप जब भी यहाँ आएं तो इन खुबसूरत नजारों का आनंद जरुर ले।

Suhajni Devi Ka Mela
सुहजनी माता का दशहरा

सुहजनी के मेले में शासन द्वारा व्यवस्था बहुत ही अच्छे स्तर पर की जाती हैं। जिसमे पुलिस प्रशासन की पूरी टीम तैनात की जाती हैं।

सुहजनी पहुँचने का मार्ग

  • मझौली से सुहजनी 8 km, पार्किंग 2 km के पहले सुहजनी पहुँचने का यह मुख्य मार्ग हैं।
  • जबलपुर से इन्द्रना रोड (लड़ोई लुहारी गाँव से होकर) जो थोडा सा कच्चा मार्ग है 5 km,पार्किंग 2 km के पहले।
  • जबलपुर से कटंगी पोला हो कर या मझौली हो कर पक्का मार्ग या पोला से कच्चा मार्ग,पार्किंग पास में।
  • जबलपुर से कटंगी गठौरा हो कर कच्चा मार्ग,पार्किंग पास में ।
  • जबलपुर से कटंगी पोला हो कर मझौली हो कर पक्का मार्ग या पोला से कच्चा मार्ग,पार्किंग 2 km के पहले।

सुहजनी वाली माता का विसर्जन समारोह

सुहजनी वाली माता का विसर्जन होने से पहले पूरी रात माँ के दरवार में दूर-दूर से गायक आते हे जो वहाँ आकर सभी लोगों का मनोरंजन व माता का भजन-कीर्तन करते हैं। सुबह 4.00 am के समय के दिन यहाँ पर माता रानी का भव्य जलशा निकलता है। जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं।

सुहजनी वाली माता का भव्य जलसा निकलने के तुरन्त बाद माताजी के विसर्जन की तैयारी शुरू हो जाती है। जो कि पास के तालाब में विसर्जन की जाती हैं जिसके पश्चात वहाँ पर इतनी अधिक भीड़ होती हैं, कि पैर रखने ले लिए जगह कम पड़ जाती हैं।

सुहजनी वाली माता का विसर्जन के लिए बैंड बाजों के साथ में ले जाते है। मैयाजी को एक बार उठाने के पश्चात सिर्फ विसर्जन स्थान पर ही रखा जाता हैं जहाँ मैयाजी की अंतिम आरती होने के पश्चात् मैयाजी को विसर्जित कर दिया जाता हैं।

सुहजनी में ठहरने और खाने की व्यवस्था

अगर आप वंहा पर जाते हैं तो आपको खाने पीने की पूरी व्यवस्ता मिलती है। दशहरे के शुरु दिन से ही विशाल भंडारे का आयोजन किया जाता है, जहाँ पर आप ठहर कर खाना खा सकते है जब की देर तक आराम कर सकते है।

FAQ : हमेशा पूछे जाने वाले प्रश्न

मझौली से सुहजनी की दुरी कितनी हैं ?

मझौली से सुहजनी 8 KM दूर हैं।

जबलपुर से सुहजनी की दुरी कितनी हैं ?

जबलपुर से सुहजनी 50 KM दूर हैं।

कटंगी से सुहजनी की दुरी कितनी हैं ?

कटंगी से सुहजनी 8 KM दूर हैं।

सुहजनी वाली माता मंदिर कहाँ पर हैं ?

सुहजनी वाली माता मंदिर सुहजनी गाँव जो मझौली तहसील के पास जिला जबलपुर में स्थित हैं।

सुहजनी वाली माता मंदिर क्यों प्रसिद्ध हैं ?

मातारानी द्वारा लम्बें समय से लोगों की मन्नते पूरी करती आ रही हैं, और हजारों चाँदी के छत्तर भक्तों द्वारा माता रानी को चढ़ाये जातें हैं।

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