Amarkantak Travel Guide

Amarkantak : माँ नर्मदा उद्गम स्थल अमरकंटक यात्रा

Amarkantak : अमरकंटक भारत के मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में स्थित एक तीर्थस्थल है। यह विंध्य पर्वत श्रृंखला के पूर्वी हिस्से में स्थित है और नर्मदा नदी का स्रोत है, जो भारत की सात पवित्र नदियों में से एक है। यह अमरकंटक मंदिर का घर भी है, जो भगवान शिव को समर्पित है।

यह शहर अपनी प्राकृतिक सुंदरता, हरे-भरे जंगलों और कई मंदिरों और तीर्थस्थलों के लिए जाना जाता है। यह क्षेत्र अपने गर्म पानी के झरनों के लिए भी जाना जाता है और पर्यटकों और तीर्थयात्रियों के बीच समान रूप से लोकप्रिय है।

अमरकंटक माँ नर्मदा नदी का उदगम और हिन्दुओं का एक पवित्र स्थल है, और यह मैकाल पर्वत पर जो की जिला अनुपपुर मध्य प्रदेश में स्थित है

Table of Contents

Amarkantak Yatra

मां नर्मदा उद्गम स्थल अमरकंटक एक पवित्र स्थल है जहां पर माँ नर्मदा उद्गम होता है। मां नर्मदा एक पवित्र नदी है जो भारत की श्रेष्ठ नदियों में से एक है। इसकी उत्पत्ती अमरकंटक मैकाल पर्वत से होती है और वह नर्मदा घाटी में होती हुई है, अरब सागर में जा मिलती है।

इस स्थल पर बहुत सारे मंदिर और धार्मिक स्थानों पर बहुत सारी देवी-देवताओं का आकर्षण है। मां नर्मदा उद्गम स्थल अमरकंटक एक ऐसा स्थान है जो शांति और पवित्रता के लिए जाना जाता है। यहां पर आने से लोगों को शांति और पवित्र प्राप्त होती है।

Maa Narmda Udgam Sthal Amarkantak Yatra
Maa Narmda Udgam Sthal Amarkantak Yatra

अमरकंटक यात्रा भारत के मध्य प्रदेश में पवित्र शहर अमरकंटक की तीर्थ यात्रा है। यह हिंदुओं के लिए सबसे पवित्र स्थानों में से एक है, और हर साल हजारों तीर्थयात्री इस स्थान पर आते हैं। यात्रा अक्टूबर और नवंबर के महीनों में प्रतिवर्ष आयोजित की जाती है, और इसमें महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों जैसे अमरकंटक मंदिर, नर्मदा कुंड, और मैकाल पहाड़ियों की यात्रा शामिल है।

तीर्थयात्री इस क्षेत्र के झरने और घने जंगलों जैसे प्राकृतिक सौंदर्य के स्थानों की यात्रा भी करते हैं। माना जाता है कि यह यात्रा तीर्थयात्रियों को आध्यात्मिक शांति और संतुष्टि प्रदान करती है और इस क्षेत्र की सुंदरता और संस्कृति का अनुभव करने का एक शानदार तरीका है।

    नर्मदाकुंड (Narmda Kund)

    नर्मदाकुंड मंदिर, माँ नर्मदा नदी का उदगम स्‍थल पर स्थित मंदिरों का समूह है। जिसमें अनेक मंदिर बने हुए हैं। इन मंदिरों में माँ नर्मदा और भगवान शिव मंदिर भी स्थित है। नर्मदा कुंड अमरकंटक, मध्य प्रदेश, भारत में स्थित एक प्राकृतिक जलाशय है। इसे भारत की पवित्र नदियों में से एक नर्मदा नदी का स्रोत माना जाता है।

    कुंड अमरकंटक पठार पर स्थित है और घने जंगल से घिरा हुआ है। यह हिंदुओं के लिए एक लोकप्रिय तीर्थ स्थल है जो कुंड के पवित्र जल में डुबकी लगाने के लिए यहां इकट्ठा होते हैं। यह क्षेत्र कई प्राचीन मंदिरों और अन्य धार्मिक स्थलों का भी घर है।

    armda Kund : नर्मदा कुंड अमरकंटक, मध्य प्रदेश, भारत में स्थित एक पवित्र स्थल है। यह नर्मदा नदी का स्रोत है, जो भारत की सबसे पवित्र नदियों में से एक है। नर्मदा कुंड समुद्र तल से 1065 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और विंध्य और सतपुड़ा पर्वत श्रृंखलाओं से घिरा हुआ है। यहां आपको नर्मदा कुंड के बारे में जानने की जरूरत है:

    दंतकथा:

    हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव ने नर्मदा कुंड में डुबकी लगाकर नर्मदा नदी का निर्माण किया था। नदी को बहुत पवित्र माना जाता है, और माना जाता है कि नर्मदा कुंड में डुबकी लगाने से व्यक्ति के पाप धुल जाते हैं।

    जगह:

    नर्मदा कुंड मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले के एक छोटे से शहर अमरकंटक में स्थित है। यह शहर विंध्य और सतपुड़ा पर्वत श्रृंखलाओं के मिलन बिंदु पर स्थित है और घने जंगलों और पहाड़ियों से घिरा हुआ है।

    महत्व:

    नर्मदा कुंड हिंदुओं के लिए एक लोकप्रिय तीर्थ स्थल है, और कई भक्त कुंड में पवित्र डुबकी लगाने के लिए आते हैं। ऐसा माना जाता है कि कुंड में डुबकी लगाने से सारे पाप धुल जाते हैं और आत्मा शुद्ध हो जाती है। नर्मदा नदी को “रेवा” नदी के रूप में भी जाना जाता है, और यह माना जाता है कि नदी में एक डुबकी मोक्ष प्राप्त करने में मदद कर सकती है।

    आकर्षण:

    नर्मदा कुंड के अलावा, अमरकंटक कई अन्य लोकप्रिय आकर्षणों का घर है, जैसे कि कपिल धारा जलप्रपात, दूध धारा जलप्रपात और कलचुरी काल के प्राचीन मंदिर। यह शहर अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी जाना जाता है और घने जंगलों और पहाड़ियों से घिरा हुआ है।

    यात्रा करने का सबसे अच्छा समय:

    नर्मदा कुंड जाने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च तक है जब मौसम सुखद और ठंडा होता है। इस समय के दौरान तापमान 5 डिग्री सेल्सियस से 25 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है, जो इसे दर्शनीय स्थलों की यात्रा और बाहरी गतिविधियों के लिए एक आदर्श समय बनाता है।

    पहुँचने के लिए कैसे करें:

    अमरकंटक सड़क मार्ग से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है और आस-पास के शहरों जैसे जबलपुर, बिलासपुर और शहडोल से आसानी से पहुँचा जा सकता है। निकटतम हवाई अड्डा जबलपुर में है, जो लगभग 230 किमी दूर है, और निकटतम रेलवे स्टेशन पेंड्रा रोड पर है, जो लगभग 17 किमी दूर है।

    अंत में, हिंदू पौराणिक कथाओं और आध्यात्मिकता में रुचि रखने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए नर्मदा कुंड अवश्य जाना चाहिए। साइट की प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण इसे आराम करने और फिर से जीवंत करने के लिए एक आदर्श स्थान बनाते हैं। नर्मदा कुंड की अपनी यात्रा की योजना बनाएं और इस पवित्र स्थल की आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव करें।

    Narmda Udgam Sthal Amarkantak
    Narmda Mandir Amarkantak

    नर्मदा मंदिर

    नर्मदा मंदिर भारत के उज्जैन में स्थित एक हिंदू मंदिर है। यह चार शक्ति पीठों में से एक है, और देवी नर्मदा की पूजा के लिए समर्पित है। माना जाता है कि मंदिर गुप्त काल के दौरान बनाया गया था, और इसे देश के सबसे पुराने मंदिरों में से एक माना जाता है। मंदिर परिसर में एक बड़े हॉल और एक प्राकृतिक झरने के साथ कई मंदिर हैं। मंदिर नवरात्रि मेला और यात्रा सहित कई त्योहारों का भी घर है।

    Maa Narmada Udgam Amarkantak
    Maa Narmada Udgam Amarkantak

    श्री राम जानकी मंदिर अमरकंटक

    श्री राम जानकी मंदिर मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले के अमरकंटक में स्थित है। यह मंदिर भगवान राम और उनकी पत्नी सीता को समर्पित है। माना जाता है कि यह मंदिर एक स्थानीय राजा द्वारा बनवाया गया था और यह भगवान राम के भक्तों के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है। मंदिर परिसर में भगवान शिव और अन्य देवताओं को समर्पित एक मंदिर भी है।

    Sri ram Janki Mandir
    Sri ram Janki Mandir

      पंचमाथा मंदिर (Panchmatha temples)

      पंचमठ मंदिर मध्य प्रदेश के अमरकंटक क्षेत्र में स्थित भगवान शिव के मंदिर हैं। ये मंदिर चित्रगुप्त मंदिर, कोटि तीर्थ मंदिर, व्यास मंदिर, नर्मदा मंदिर और शिव मंदिर हैं। माना जाता है कि इन मंदिरों का निर्माण 11वीं शताब्दी में कलचुरी राजवंश के शासनकाल के दौरान किया गया था।

      Panchmatha Temples
      Panchmatha Temples

      अमरकंटक में स्थित पंचमठ मंदिर, भारत के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। मंदिर प्रकृति के पांच तत्वों – पृथ्वी, वायु, अग्नि, जल और आकाश को समर्पित है। ऐसा माना जाता है कि मंदिर का निर्माण स्वयं भगवान शिव ने किया था। मंदिर एक लोकप्रिय तीर्थस्थल है क्योंकि माना जाता है कि इसमें अपार आध्यात्मिक शक्ति है और इसे पवित्र नर्मदा नदी का स्रोत कहा जाता है।

      मंदिर परिसर में एक शिव मंदिर, एक विष्णु मंदिर और एक हनुमान मंदिर है। पंचमठ मंदिर को पौराणिक पंचामृत यज्ञ का स्थल माना जाता है, जो प्रकृति के पांच तत्वों को बनाने के लिए भगवान शिव द्वारा किया जाने वाला एक पवित्र समारोह है। यह मंदिर अपनी जटिल वस्तुकला और सुंदर मूर्तियों के लिए भी जाना जाता है।

      शिव मंदिर अमरकंटक

      शिव मंदिर अमरकंटक भारत के अमरकंटक क्षेत्र में स्थित एक प्राचीन मंदिर है। यह 2000 वर्ष से अधिक पुराना माना जाता है और भारत के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है। मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और माना जाता है कि यह नर्मदा नदी का स्रोत है। मंदिर हजारों वर्षों से तीर्थस्थल रहा है और इसे हिंदुओं द्वारा एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल माना जाता है।

      मंदिर को वह स्थान कहा जाता है जहां भगवान शिव की पत्नी पार्वती का जन्म हुआ था। यहां विभिन्न अनुष्ठान और समारोह आयोजित किए जाते हैं, और यह पर्यटकों के लिए एक लोकप्रिय गंतव्य भी है।

      Juhila temple Amarkantak
      Sonanadi Wildlife Sanctuary Uttarakhand

      कलचुरी कालीन प्राचीन मंदिर ( Ancient Temples of Kalachuri group)

      कलचुरी वंश मध्य और पश्चिमी भारत का एक शाही राजवंश था, जिसने 8वीं से 12वीं शताब्दी के दौरान शासन किया था। कई मंदिर हैं जो कलचुरी राजवंश के शासनकाल के दौरान बनाए गए थे, जैसे अमरावती में अमृतेश्वर मंदिर, देवगढ़ में विष्णु मंदिर, भूमरा में शिव मंदिर, नेमावर में महादेव मंदिर और तेल्हारा में सूर्य मंदिर। ये मंदिर अपनी जटिल नक्काशी और अलंकृत स्थापत्य शैली के लिए प्रसिद्ध हैं।

      Ancient Temples of Kalachuri group
      Ancient Temples of Kalachuri group

      कलचुरी राजवंश भारत का एक शाही राजवंश था जिसने भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तरी भागों में 6वीं और 12वीं शताब्दी के बीच शासन किया था। इस अवधि के दौरान, उन्होंने पूरे क्षेत्र में कई मंदिरों की स्थापना की, जिनमें से कई आज भी खड़े हैं।

      अमरकंटक क्षेत्र में कलचुरी समूह के कुछ प्रमुख मंदिरों में शामिल हैं:

      1. मल्हार महादेव मंदिर: नर्मदा नदी के उद्गम स्थल के पास स्थित यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और 11वीं शताब्दी में बनाया गया था।
      2. भरतहरी गुफा: यह अमरकंटक में स्थित भगवान विष्णु को समर्पित एक गुफा मंदिर है। इसे इस क्षेत्र के सबसे पुराने मंदिरों में से एक माना जाता है।
      3. गोंडेश्वर मंदिर: यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और इसे 12वीं शताब्दी में बनाया गया था। यह कलचुरी राजवंश के सबसे पुराने जीवित मंदिरों में से एक है।
      4. केदारेश्वर मंदिर: यह मंदिर भी भगवान शिव को समर्पित है और माना जाता है कि इसे 7वीं शताब्दी में बनाया गया था। यह अमरकंटक के सबसे महत्वपूर्ण मंदिरों में से एक है।
      5. पन्ना धाय मंदिर: यह मंदिर क्षेत्र की लोकप्रिय देवी पन्ना धाय को समर्पित है। इसका निर्माण 11वीं शताब्दी में माना जाता है।
      6. कलचुरी मंदिर: यह मंदिर अमरकंटक में स्थित है और भगवान शिव को समर्पित है। इसका निर्माण 11वीं शताब्दी में माना जाता है।

      Juhila Temple Amarkantak

      अमरकंटक भारत के सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ स्थलों में से एक है। यह मध्य प्रदेश राज्य में विंध्य और सतपुड़ा पर्वतमाला के मध्य में स्थित है। इसे नर्मदा नदी का स्रोत माना जाता है और यह एक प्रमुख हिंदू तीर्थ स्थल है। भगवान शिव को समर्पित जुहिला मंदिर अमरकंटक के सबसे महत्वपूर्ण मंदिरों में से एक है।

      माना जाता है कि इसका निर्माण उज्जैन के राजा विक्रमादित्य ने करवाया था। मंदिर अपनी जटिल नक्काशी के लिए जाना जाता है और इस क्षेत्र में एक प्रमुख पर्यटक आकर्षण है।

      मंदिर कई प्राचीन मूर्तियों और मूर्तियों का भी घर है, जो 5वीं और 6वीं शताब्दी की हैं। मंदिर में शिव, पार्वती, गणेश, विष्णु और हनुमान जैसे विभिन्न देवताओं को समर्पित कई मंदिर भी हैं। यह मंदिर अपने भव्य त्योहारों और समारोहों के लिए जाना जाता है, जिसमें देश भर से हजारों भक्त शामिल होते हैं।

      Juhila Temple Amarkantak
      Juhila Mandir

      Pataleshwar mahadev Temples Amarkantak

      पातालेश्वर महादेव मंदिर अमरकंटक पातालेश्वर महादेव मंदिर का स्थान है। यह भारत के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है, माना जाता है कि इसे 11वीं शताब्दी में कलचुरी राजवंश के शासनकाल के दौरान बनाया गया था। मंदिर भगवान शिव को समर्पित है, और इसका निर्माण नागर शैली की वास्तुकला में किया गया है।

      मंदिर परिसर में भगवान विष्णु को समर्पित एक छोटा मंदिर और पातालेश्वर कुंड के नाम से जाना जाने वाला एक पवित्र सरोवर भी है। मंदिर, जो घने जंगलों में स्थित है, नंदी, बैल और अन्य देवताओं की उल्लेखनीय पत्थर की मूर्तियों से घिरा हुआ है। मंदिर एक प्रमुख तीर्थ स्थल है, जहां साल भर हजारों भक्तों का आना-जाना लगा रहता है।

      Pataleshwar Mahadev Temple
      Pataleshwar Mahadev Temple

      कर्ण मंदिर अमरकंटक Karan Temples Amarkantak

      कर्ण मंदिर मध्य प्रदेश के अमरकंटक में स्थित एक मंदिर है। यह हिंदू महाकाव्य महाभारत में कुंती के पुत्र करण को समर्पित है। माना जाता है कि मंदिर का निर्माण 8वीं शताब्दी में हुआ था। मंदिर वास्तुकला की नागर शैली में बनाया गया है और जटिल नक्काशी से सजाया गया है। मंदिर का मुख्य मंदिर चार पहियों और चार घोड़ों वाले रथ के रूप में है। मंदिर के अंदर अन्य हिंदू देवताओं के कई मंदिर भी स्थित हैं।

      Karan Temple Amarkantak
      Karan Mandir

      कोटि तीर्थ कुंड

      कोटि तीर्थ कुंड अमरकंटक, भारत में पवित्र तालाबों में से एक है। अमरकंटक पहाड़ी श्रृंखला के मध्य में स्थित, इसे नर्मदा नदी का उद्गम स्थल माना जाता है। इसे भारत के सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ स्थलों में से एक माना जाता है।

      हजारों भक्त यहां पवित्र सरोवर के पानी में डुबकी लगाने के लिए आते हैं, यह विश्वास करते हुए कि यह उनके पापों को धो देगा और सौभाग्य लाएगा। कुंड कई मंदिरों और मंदिरों से घिरा हुआ है, जो इसे आध्यात्मिक साधकों के लिए एक लोकप्रिय गंतव्य बनाता है।

      Koti Tirtha Kund Maa Narmda River
      Koti Tirtha Kund

      बर्फानी आश्रम अमरकंटक

      अमरकंटक आश्रम (बर्फानी आश्रम) मध्य प्रदेश के अमरकंटक में स्थित एक हिंदू आश्रम है। यह हिंदुओं का एक लोकप्रिय तीर्थ स्थल है। आश्रम नर्मदा नदी के पास एक शांत और सुंदर जगह में स्थित है और आध्यात्मिक वातावरण है। इसकी स्थापना दिवंगत सद्गुरु श्री रंग अवधूत महाराज द्वारा वर्ष 1984 में की गई थी।

      आश्रम आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान करता है और इसमें कई आध्यात्मिक गतिविधियाँ होती हैं। इसमें श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था भी है।

      आश्रम में भगवान शिव, भगवान विष्णु, देवी पार्वती और भगवान गणेश सहित विभिन्न हिंदू देवताओं को समर्पित कई मंदिर हैं। जप, ध्यान और योग जैसी विभिन्न आध्यात्मिक गतिविधियों की पेशकश करने वाले कुछ ध्यान हॉल और आध्यात्मिक केंद्र भी हैं। आश्रम नर्मदा उत्सव, शिवरात्रि और नवरात्रि जैसे विभिन्न त्योहारों और कार्यक्रमों का भी आयोजन करता है।

      आश्रम भक्तों को विभिन्न सेवाएं भी प्रदान करता है, जैसे भोजन, आवास और चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करना। इसमें एक पुस्तकालय भी है, जहाँ आध्यात्मिक विषयों पर पुस्तकें उपलब्ध हैं। भक्त विभिन्न धार्मिक गतिविधियों जैसे पूजा, यज्ञ और में भी भाग ले सकते हैं

      श्री यंत्र मंदिर अमरकंटक (Shri Yantr Mandir)

      श्री यंत्र मंदिर मध्य प्रदेश के अमरकंटक में स्थित एक मंदिर है। यह भगवान शिव को समर्पित है और इसे अमरकंटक के सबसे महत्वपूर्ण मंदिरों में से एक माना जाता है। माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण स्वयं भगवान राम ने किया था। कहा जाता है कि यह वह स्थान है जहां भगवान शिव ने तपस्या की थी और ज्ञान प्राप्त किया था।

      मंदिर अपनी जटिल नक्काशी और मूर्तियों के लिए जाना जाता है। यह अपने प्राचीन यंत्रों और मंत्रों के लिए भी जाना जाता है जिनका उपयोग ध्यान और पूजा के लिए किया जाता है। मंदिर हरे-भरे हरियाली से घिरा हुआ है और अमरकंटक में एक लोकप्रिय पर्यटक आकर्षण है।

      Shri Yantra Mandir
      Shri Yantra Mandir

      कपिलधारा (Kapil Dhara Water Fall Amarkantak)

      नर्मदा नदी पर बनने वाला पहला प्रपात है, जो उद्गम के 8 किमी की दूरी पर स्थित है। लगभग 100 फीट की ऊंचाई से गिरने वाला कपिलधारा झरना बहुत सुंदर और लोकप्रिय है। धर्मग्रंथों में कहा गया है कि कपिल मुनी यहां रहते थे। घने जंगलों, पर्वतों और प्रकृति के सुंदर नजारे यहां से देखे जा सकते हैं।

      माना जाता है कि कपिल मुनी ने सांख्‍य दर्शन की रचना इसी स्‍थान पर की थी। कपिलधारा के निकट की कपिलेश्‍वर मंदिर भी बना हुआ है। कपिलधारा के आसपास अनेक गुफाएं है जहां साधु संत ध्‍यानमग्‍न मुद्रा में देखे जा सकते हैं।

      Kapil Dhara Amarkantak
      Kapil Dhara

      कपिल धारा जलप्रपात मध्य प्रदेश के अमरकंटक क्षेत्र में स्थित है। यह राज्य के सबसे सुंदर झरनों में से एक है और मान और नर्मदा नदियों के संगम के पास स्थित है। पानी लगभग 30 फीट की ऊंचाई से गिरता है और हरे-भरे जंगलों और पहाड़ियों से घिरा हुआ है। झरने का दृश्य लुभावना है और अमरकंटक आने वाले पर्यटकों के लिए यह एक लोकप्रिय स्थान है।

      कबीर चबूतरा

      अमरकंटक भारत के मध्य प्रदेश राज्य में स्थित एक तीर्थ स्थल है। यह नर्मदा और सोन नदियों के उद्गम स्थल पर स्थित है, और इसे हिंदुओं के लिए एक पवित्र स्थान माना जाता है। कबीर चबूतरा, जिसे कबीर मठ के नाम से भी जाना जाता है, अमरकंटक में स्थित कई पवित्र स्थलों में से एक है। यह 15वीं शताब्दी के कवि और रहस्यवादी कबीर को समर्पित एक मंदिर है, जो हिंदू और मुस्लिम दोनों के लिए पूजनीय हैं।

      मंदिर का निर्माण 1872 में स्थानीय शासक, राजा जानकी प्रसाद सिंह देव द्वारा किया गया था, और इसका प्रबंधन कबीर पंथ द्वारा किया जाता है, जो कबीर की शिक्षाओं को बढ़ावा देने के लिए काम करता है। मंदिर में कबीर को समर्पित एक मंदिर और एक संग्रहालय है जिसमें उनके लेखन और उनसे संबंधित कलाकृतियां हैं।

      यह एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है, और लोग उनके सम्मान का भुगतान करने और कबीर के जीवन और शिक्षाओं के बारे में जानने के लिए आते हैं।

      Kaveer Chabutra
      कबीर चबूतरा

      स्‍थानीय निवासियों और कबीरपंथियों के लिए कबीर चबूतरे का बहुत महत्‍व है। कहा जाता है कि संत कबीर ने कई वर्षों तक इसी चबूतरे पर ध्‍यान लगाया था। कहा जाता है कि इसी स्‍थान पर भक्त कबीर जी और सिक्खों के पहले गुरु श्री गुरु नानकदेव जी मिलते थे। उन्होंने यहां अध्‍यात्‍म व धर्म की बातों के साथ मानव कल्‍याण पर चर्चाएं की।

      कबीर चबूतरे के निकट ही कबीर झरना भी है। मध्‍य प्रदेश के अनूपपुर और डिंडोरी जिले के साथ छत्तीसगढ़ के बिलासपुर और मुंगेली की सीमाएं यहां मिलती हैं।

      हाथी फल

      elephant apple
      हाथीफ़ल

      दूधधारा

      अमरकंटक में दूधधारा झरना, कपिलधारा से 500 मीटर की दुरी पर है काफी लो‍कप्रिय है। ऊंचाई से गिरते इस झरने का जल दूध के समान प्रतीत होता है इसीलिए इसे दूधधारा के नाम से जाना जाता है।

      Dudh Dhara Waterfall Narmda River
      Dudh Dhara Water fall

      अमरकंटक छत्तीसगढ़ राज्य में सतपुड़ा के मैकाल रेंज में स्थित एक हिल स्टेशन है। यह दो नदियों, नर्मदा और सोन का स्रोत है, जो दोनों पूर्व की ओर बहती हैं। नर्मदा नदी शहर से होकर बहती है और सोन पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश से होकर बहती है।

      यह क्षेत्र हरे-भरे जंगलों से आच्छादित है और अपने समृद्ध वन्य जीवन के लिए जाना जाता है। अमरकंटक एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है और कई हिंदू मंदिरों और अन्य धार्मिक स्थलों का घर है।

      नर्मदा नदी अपने पवित्र जल के लिए भी जानी जाती है और इसे एक पवित्र नदी माना जाता है। यह शहर राज्य के कुछ सबसे पुराने स्मारकों का भी घर है, जैसे अमरकंटक मंदिर, कंकाली देवी मंदिर और लक्ष्मण मंदिर। अमरकंटक वन्यजीव अभयारण्य और अमरकंटक जलप्रपात सहित शहर में और इसके आसपास कई अन्य आकर्षण भी हैं।

      सुन्दर द्रश्य यात्रा जबलपुर से अमरकंटक मार्ग

      मैकल पर्वत सुन्दर द्रश्य (Maikal mountain beautiful view)

      मैकल रेंज भारत की सबसे खूबसूरत पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है। यह मध्य भारतीय राज्य मध्य प्रदेश में स्थित है, और विंध्य रेंज का हिस्सा है। मैकाल रेंज से आसपास के ग्रामीण इलाकों के कुछ बेहद खूबसूरत नज़ारे दिखाई देते हैं। हरी-भरी पहाड़ियाँ, छोटे-छोटे गाँवों से युक्त, एक सुरम्य परिदृश्य का निर्माण करती हैं।

      रेंज बाघों, तेंदुओं और सुस्त भालू सहित विभिन्न प्रकार के वन्यजीवों का भी घर है। बर्डवॉचर्स को पक्षियों की कई प्रजातियाँ भी मिल सकती हैं, जिनमें राज्य पक्षी, भारतीय मोर भी शामिल है। मैकल रेंज प्रकृति की सुंदरता का पता लगाने और अनुभव करने के लिए एक बेहतरीन जगह है।

      मनोहर द्रश्य डिंडोरी मार्ग

      डिंडोरी मध्य प्रदेश का एक शहर है। यह डिंडोरी जिले का मुख्यालय है। यह वैनगंगा नदी के तट पर स्थित है और अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। यह शहर प्रसिद्ध भीमकुंड और रत्नेश्वर मंदिरों सहित कई मंदिरों और अन्य पूजा स्थलों का घर है।

      डिंडोरी पक्षियों, स्तनधारियों, सरीसृपों और उभयचरों की कई प्रजातियों के साथ अपने समृद्ध वन्य जीवन के लिए भी जाना जाता है। डिंडोरी के आसपास का क्षेत्र अपने कई झरनों, गुफाओं और अन्य दर्शनीय आकर्षणों के लिए भी जाना जाता है।

      मधुमाखी पालन

      मधुमक्खी पालन छत्ते के शहद और अन्य उत्पादों की कटाई के उद्देश्य से, आमतौर पर मानव निर्मित छत्तों में शहद मधुमक्खी कालोनियों के प्रबंधन का अभ्यास है। मधुमक्खी पालक धूम्रपान करने वालों, मधुमक्खी के सूट और फ्रेम सहित अपने छत्तों के प्रबंधन के लिए कई प्रकार के उपकरणों और तकनीकों का उपयोग करते है। मधुमक्खी पालन दुनिया भर में एक लोकप्रिय शौक और पेशा है, और मधुमक्खियों की आबादी के स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।

      ऊँट का दल

      दो दर्जन से भी अधिक ऊंटों का एक समूह है जो सामान, लोगों और सामग्रियों को लंबी दूरी तक ले जाने के लिए उपयोग किया जाता है। ऊंट दुनिया के कई हिस्सों में परिवहन का एक सामान्य रूप है, खासकर रेगिस्तानी क्षेत्रों में। एक विशिष्ट ऊंट टीम एक या दो प्रमुख ऊंटों और कई पैक ऊंटों से बनी होती है, जो भार उठाते हैं।

      आमतौर पर, प्रमुख ऊंटों को एक चालक द्वारा सवार किया जाएगा, जबकि पैक ऊंटों को प्रमुख ऊंटों द्वारा निर्देशित किया जाता है। ऊँट भारी बोझ ढोने की क्षमता, रेत पर अपने निश्चित पांव और निर्जलीकरण के प्रतिरोध के कारण रेगिस्तान की यात्रा के लिए उपयुक्त हैं।

      वह क्या सीन है

      अमरकंटक मध्य भारत की मैकाल पर्वत श्रृंखला में स्थित एक मनोरम हिल स्टेशन है। यह क्षेत्र भारत की दो सबसे महत्वपूर्ण नदियों, नर्मदा और सोन के स्रोत का घर है। यह क्षेत्र प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर है, जिसमें हरी-भरी हरियाली, जगमगाते झरने और घने जंगल शामिल हैं।

      यह कई प्राचीन मंदिरों और स्मारकों का घर भी है, जैसे कलचुरी मंदिर, अमरेश्वर मंदिर, रामनगर किला और मड़ई गुफाएं। यह क्षेत्र अपने वन्य जीवन और पक्षी प्रजातियों के लिए भी जाना जाता है। अमरकंटक के पर्यटक क्षेत्र के कई आकर्षणों जैसे ट्रेकिंग, वन्यजीव सफारी और नौका विहार का पता लगा सकते हैं।

      डिंडौरी जिला

      डिंडोरी भारत के मध्य प्रदेश राज्य का एक प्रशासनिक जिला है। जिला मुख्यालय डिंडोरी में स्थित है। जिले का क्षेत्रफल 4,615 किमी² है और इसकी आबादी 812,931 (2011 तक) है।

      डिंडौरी का भूगोल

      डिंडोरी जिला मध्य प्रदेश के उत्तरी भाग में, मध्य भारत के सतपुड़ा रेंज में स्थित है। यह उत्तर पश्चिम में मंडला, उत्तर पूर्व में बालाघाट, पूर्व में छिंदवाड़ा, दक्षिण में नरसिंहपुर और दक्षिण पश्चिम में सिवनी जिलों से घिरा है। जिले की औसत ऊंचाई 459 मीटर है।

      जिले को पांच तहसीलों में विभाजित किया गया है: डिंडोरी, शाहपुरा, बिछिया, अमरपुर और करंजिया। जिले की मुख्य नदियाँ नर्मदा, तवा और देनवा हैं।

      डिंडौरी की जलवायु

      डिंडोरी जिले की जलवायु की विशेषता गर्म गर्मी, जून से सितंबर तक बरसात का मौसम और ठंडी सर्दी है। औसत वार्षिक तापमान लगभग 24°C है, सर्दियों में औसत न्यूनतम तापमान लगभग 10°C और गर्मियों में औसत उच्च लगभग 40°C है। और पढ़े ..

      रामतिल का खेत बेहद सुन्दर

      रामतिल के खेत बेहद खूबसूरत है। यह पीले रंग से जंगली फूलों से भरा हुआ है। एक छोटी सी जलधारा है जो खेत के बीच से होकर गुजरती है, जिसके किनारे छोटी सी चट्टान हैं। नीला आसमान और सूरज चमकीला चमक रहा है। पक्षी गा रहे हैं और हवा ताजा और स्वच्छ है। यह एक शांतिपूर्ण और शांत जगह है, जो शांत टहलने या दोस्तों के साथ पिकनिक के लिए उपयुक्त है।

      कल्चुरी काल के मंदिर

      अमरकंटक कलचुरी काल का एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है, जो भारत के आधुनिक राज्य मध्य प्रदेश में स्थित है। कलचुरी काल में प्रसिद्ध अमरकंटक मंदिर सहित क्षेत्र में कई मंदिरों का निर्माण हुआ। मंदिर नर्मदा और सोन नदियों के संगम पर स्थित है और हिंदू भगवान शिव को समर्पित है। कहा जाता है कि यह मंदिर मध्य भारत के कलचुरी राजवंश के शासनकाल के दौरान बनाया गया था, जिन्होंने 11वीं से 14वीं शताब्दी सीई तक इस क्षेत्र पर शासन किया था।

      मंदिर हिंदू और जैन वास्तुकला का मिश्रण है, जिसमें शिव को समर्पित एक मुख्य मंदिर और विष्णु, ब्रह्मा और शक्ति जैसे अन्य देवताओं को समर्पित छोटे मंदिर हैं। मंदिर में एक बड़ा तालाब और कई अन्य छोटे मंदिर भी हैं। मंदिर हिंदुओं के लिए एक लोकप्रिय तीर्थ स्थल है, और नर्मदा और सोन नदियों के अद्भुत दृश्यों के लिए जाना जाता है।

      माँ नर्मदा उद्गम स्थल, नर्मदाकुंड के दक्षिण में 100 मीटर की दुरी पर कलचुरी काल मै निर्मित प्राचीन एवं पुरातात्विक और धार्मिक महत्त्व के मंदिर बने हुए हैं। इन मंदिरों का निर्माण कलचुरी महाराजा कर्णदेव ने 1041-1073 ई. के दौरान बनवाया था। मछेन्‍द्रथान और पातालेश्‍वर मंदिर इस काल के मंदिर निर्माण कला के बेहतरीन उदाहरण हैं।

      सूर्य मंदिर अमरकंटक

      अमरकंटक का सूर्य मंदिर हिंदू भगवान सूर्य को समर्पित एक मंदिर परिसर है और अमरकंटक, मध्य प्रदेश में स्थित है। मंदिर परिसर 16वीं शताब्दी में बनाया गया था और यह भारत के सबसे पुराने जीवित मंदिरों में से एक है। मंदिर अपनी सुंदर वास्तुकला के लिए जाना जाता है और सूर्य के भक्तों के लिए एक लोकप्रिय तीर्थ स्थान है।

      मंदिर परिसर एक बड़ी झील से घिरा हुआ है और विभिन्न प्रकार के पक्षियों का घर है। परिसर के भीतर मुख्य मंदिर सूर्य को समर्पित है और अन्य देवी-देवताओं को समर्पित कई छोटे मंदिरों से घिरा हुआ है। मंदिर में एक संग्रहालय भी है जो जनता के लिए खुला है और इसमें मंदिर और उसके इतिहास से संबंधित कलाकृतियां हैं।

      शिव मंदिर अमरकंटक

      अमरकंटक में शिव मंदिर (जिसे अमरेश्वर मंदिर भी कहा जाता है) मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले के अमरकंटक शहर में स्थित भगवान शिव को समर्पित एक हिंदू मंदिर है। इसे भारत के सबसे पवित्र स्थानों में से एक कहा जाता है, और यह छोटा चार धाम तीर्थ यात्रा सर्किट का एक हिस्सा है।

      मंदिर अपनी प्राचीन वास्तुकला और नर्मदा नदी के साथ अपने जुड़ाव के लिए जाना जाता है, जिसे देवी पार्वती का एक रूप माना जाता है। मंदिर विष्णु, लक्ष्मी, सरस्वती और गणेश सहित कई अन्य देवताओं का भी घर है।

      सर्वोदय जैन मंदिर

      सर्वोदय जैन मंदिर अमरकंटक, मध्य प्रदेश, भारत में स्थित है। यह क्षेत्र के सबसे पुराने जैन मंदिरों में से एक है, जो 16वीं शताब्दी का है। मंदिर जैन तीर्थंकर, पार्श्वनाथ को समर्पित है। ऐसा माना जाता है कि पार्श्वनाथ ने स्वयं इस स्थान का दौरा किया था और इसे आशीर्वाद दिया था। मंदिर वास्तुकला की नागर शैली में बनाया गया है। इसमें कई मंदिर और एक खुला प्रांगण है। मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में जैन मूर्तियां और शिलालेख भी शामिल हैं।

      यह मंदिर भारत के अद्वितीय मंदिरों में अपना स्‍थान रखता है। इस मंदिर को बनाने में सीमेंट और लोहे का इस्‍तेमाल नहीं किया गया है। मंदिर में स्‍थापित मूर्ति का वजन 24 टन के करीब है। भगवान आदिनाथ अष्ट धातु के कमल सिंघासन पर विराजमान है कमल सिंघासन का बजन 17 टन है इस प्रकार इस प्रकार प्रतिमा और कमल सिंघासन का कुल बजन 41 टन है | प्रतिमा को मुनिश्री विद्यासागर जी महाराज ने 06 नवम्बर 2006 को विधि विधान से स्थापित किया |

      दुर्गा धरा जल प्राप्त

      अमरकंटक में दुर्गा धारा एक प्राकृतिक जल स्रोत है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इसमें उपचार गुण हैं और यह तीर्थयात्रियों के लिए एक लोकप्रिय गंतव्य है। जल स्रोत प्रसिद्ध नर्मदा मंदिर के पास पहाड़ी पर स्थित है। ऐसा कहा जाता है कि एक भूमिगत धारा है जो पास के पहाड़ से निकलती है और माना जाता है कि यह दुर्गा धारा के लिए पानी का स्रोत है। पानी ठंडा और स्वाद में मीठा होता है और माना जाता है कि यह कई स्वास्थ्य बीमारियों के लिए एक प्राकृतिक इलाज है।

      Durga Dhara Water Fall Amarkantak
      Durga Dhara Water Fall Amarkantak

      धुनी पानी आश्रम

      माँ नर्मदा नदी का उदगम स्‍थल अमरकंटक से लगभग4 किलोमीटर की दुरी में घने जंगलो के बीच स्थित है। वेहद सुन्दर शांत वातावरण है। इस स्थान पर आपको कोई भी मोबाईल नेट्वर्क उपलब्ध नहीं होगा। यहाँ जब भी जाये तो किसी स्थानी गाइड के बिना न जाये नहीं तो जंगल में भटक सकते है, और न ही अकेले जाये, यहाँ पर भालू और अन्य जंगली जानवरों से सामना हो सकता है।

      साथ ही समय का ध्यान रखे सुबह 9 बजे के पहले वहा न जाये एवं शाम 3 बजे के बाद बहा किसी भजी हल में न रुके। मै ऐ बात इस लिए लिख रहा हु की मैंने यहाँ 3 रात और 4 दिन धुनी पानी में रुकर कर गुजरे है । यहाँ मुख्य २ कुंड और सहायक 4 कुंड है।

      धूनी पानी आश्रम भारतीय राज्य मध्य प्रदेश के एक छोटे से शहर अमरकंटक में स्थित एक आश्रम है। यह आश्रम साधना के लिए समर्पित है और 20वीं सदी की शुरुआत से चल रहा है। यह सभी धर्मों के भक्तों के लिए एक लोकप्रिय गंतव्य है, और अक्सर दुनिया भर के तीर्थयात्रियों द्वारा इसका दौरा किया जाता है।

      आश्रम का प्रबंधन न्यासियों और स्वयंसेवकों के एक बोर्ड द्वारा किया जाता है। यह ध्यान कक्षाएं और अन्य आध्यात्मिक गतिविधियों जैसे कीर्तन, भाषण और व्याख्यान प्रदान करता है। आश्रम आवास, भोजन और पारंपरिक आयुर्वेदिक उपचार भी प्रदान करता है।

      धुनी पानी आश्रम में महाराज जी के साथ बिताये गए यादगार पल

      गर्म पानी का झरना

      अमरकंटक मध्य प्रदेश में सतपुड़ा की मैकाल श्रेणी में स्थित एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक और तीर्थस्थल है। यह अपने गर्म झरनों के लिए जाना जाता है, जिसके बारे में माना जाता है कि इसमें औषधीय गुण हैं। ये गर्म झरने नर्मदा नदी के पास स्थित हैं, और माना जाता है कि पानी में चिकित्सा शक्तियाँ हैं।

      गर्म झरनों के अलावा, अमरकंटक अपने मंदिरों और जंगलों के लिए भी जाना जाता है। यह नर्मदा नदी के उद्गम स्थल के करीब स्थित है, जो तीर्थयात्रियों के बीच इसकी लोकप्रियता का एक और कारण है। आस-पास के क्षेत्र भी कई प्रकार के वन्यजीवों का घर हैं, और जंगल बाघों, तेंदुओं और पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों का घर हैं।

      Maikal Parvat Amarkantak
      मैकाल पर्वत की सुन्दर वादियां

      यहाँ गर्म पानी का झरना है। कहा जाता है कि यह झरना औषधीय गुणों से संपन्‍न है और इसमें स्‍नान करने शरीर के असाध्‍य रोग ठीक हो जाते हैं। दूर-दूर से लोग इस झरने के पवित्र पानी में स्‍नान करने के उद्देश्‍य से आते हैं, ताकि उनके तमाम दुखों का निवारण हो। (Amarkantak Duni Pani Jharna Water Fall) धर्मेन्द्र सिंह, वीरेंद्र पटेल, जबलपुर मध्य प्रदेश, भाई अर्जित बेनर्जी(कोलकाता), बड़े भाई म्रतुयुन्जयसिन्हा राय(मालदा पश्चिम बंगाल),

      सोनमुड़ा

      सोनमुड़ा सोन नदी के उद्गम स्थल को कहते है सोनमुड़ा माँ नर्मदा उद्गम स्थल से 1.5 किलोमीटर दूर मैकल पर्वत पर स्थित है यहाँ सोन नदी 100 फुट ऊपर से झरने के रूप में निचे गिरती है यह आपको अत्यधिक मात्रा में बन्दर देखने को मिलेंगे

      Son Nadi Udgam Sthal Amarkantak
      Son Bhadra Amarkantak

      सोनभद्र नदी भारत के अमरकंटक में नर्मदा नदी की एक सहायक नदी है। यह विंध्य रेंज से निकलती है और मध्य प्रदेश राज्य में नर्मदा में शामिल होने से पहले उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले से होकर बहती है। सोनभद्र नदी अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जानी जाती है, और अमरकंटक आने वाले पर्यटकों के बीच लोकप्रिय है। नदी में कई झरने, सुंदर घाटियाँ और वन्यजीवों की बहुतायत है। नदी विभिन्न प्रकार की मछलियों की प्रजातियों का भी घर है, और मछली पकड़ने के बेहतरीन अवसरों के लिए जानी जाती है।

      Achanakmar Wildlife Sanctuary

      अचानकमार वन्यजीव अभयारण्य भारत में छत्तीसगढ़ राज्य के बिलासपुर जिले में स्थित एक संरक्षित वन्यजीव अभयारण्य है। यह अचानकमार-अमरकंटक बायोस्फीयर रिजर्व के दक्षिणी छोर पर स्थित है। अभयारण्य 551.55 किमी2 के क्षेत्र को कवर करता है और बंगाल टाइगर, भारतीय तेंदुआ, सुस्त भालू, भारतीय भेड़िया, जंगली कुत्ता, सांभर हिरण, चिंकारा, और नीलगाय जैसी लुप्तप्राय प्रजातियों सहित पौधों और जानवरों की प्रजातियों की एक विस्तृत विविधता का घर है।

      Narmakund

      Maa Narmada Udgam Amarkantak
      Maa Narmada Udgam Amarkantak


      Ancient temples of Kalchuri Period

      Panchmatha Temples
      Panchmatha Temples


      Kapil Falls

      Kapil Dhara Amarkantak
      Kapil Dhara

      अभयारण्य विभिन्न प्रकार के पक्षियों, सरीसृपों और उभयचरों का भी घर है। अभयारण्य सात गांवों से घिरा हुआ है और एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है। और पढ़ें ..

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