Katav Dham Majholi Jabalpur

Katav Dham Majholi : विंध्य और सतपुड़ा का वह रहस्यमयी मिलन स्थल, जहाँ पहाड़ों का सीना चीरकर बहती है नदी!

कटाव धाम (Katav Dham) मध्यप्रदेश के जबलपुर और दमोह जिले की मध्य सीमा पर स्थित एक ऐसा अलौकिक धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थल है, जहाँ कदम रखते ही ऐसा लगता है मानो आसमान जमीं पर झुक आया हो। जबलपुर जिले से 40 किलोमीटर दूर और मझौली तहसील से महज 7 किमी की दूरी पर गुबरा-दमोह रोड पर स्थित यह सिद्धधाम विंध्य और सतपुड़ा की गगनचुम्बी पर्वत श्रृंखलाओं के अद्भुत मेल (संगम) का जीवंत गवाह है। इस स्थान पर ज्यादातर लोग अपने मित्रों एवं परिवार के साथ पिकनिक मनाने आते हैं।

दो पहाड़ों के बीच से गुजरती नदी का यह दृश्य सैलानियों का मन मोह लेता है। नेचर फोटोग्राफी शौक है तो, आइये कटाव ,मन मोह लेगी ख़ूबसूरत नज़ारे चारों ओर ऊची-ऊची चट्टनों पर फैले घने जंगलों, उछल-कूंद करते नटखट बंदरों का समूह, पहाड़ी नदियों के तेज कटाव और पहाड़ों की चोटियों पर बने अनेक प्राचीन मंदिरों के कारण यह स्थान न केवल श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, बल्कि वाइल्डलाइफ और नेचर फोटोग्राफी के शौकीनों और घुमनेवालों के लिए भी स्वर्ग के समान है।

अगर आप भी इन मनमोहक द्रश्यों के बीच अपना कुछ समय बिताने और शांति का अनुभव करना चाहतें हैं तो आप भी पवित्र एवं धार्मिक पर्यटक स्थल कटाव धाम (Katav Dham Majholi) आ सकते है। मैं भी कटाव धाम के पास मझौली में रहता हूँ। और जब भी मुझे टाइम मिलता है तो मैं कटाव धाम घूमने चला जाता हूँ, जहाँ मुझे अत्याधिक शांति और सुख का अनुभव होता है।

मेरा अनुभव कहता है, कि आप भी एक बार प्रकृति की गोद में स्थित कटाव धाम में घूमने जरूर आए। थोडासा अपना समय इन प्राकृतिक नाजारो के बीच में व्यतीत करें आप यहाँ एक नया अनुभव प्राप्त करेंगे। आप भी अगर आध्यात्मिकता और एडवेंचर का बेहतरीन तालमेल और कुछ समय के लिए मानसिक शांति और प्रकृति के करीब जाना चाहते है।

इस वीकेंड पर अपने परिवार और दोस्तों के साथ इस तपोभूमि की यात्रा का प्लान जरूर बनाएँ! वहुत से लोकल नए वर्ष में पिकनिक प्लान, कटाव धाम में मनाने मझौली, जबलपुर, दमोह से भी आते है।

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जाने इस जगह को ‘कटाव धाम क्यों कहतें हैं?

यहाँ बहने वाली हिरन और केन नदी की तेज धाराओं ने हजारों वर्षों में विशाल चट्टानों को बीच से काटकर एक गहरी, मनमोहक घाटी (Gorge) का निर्माण किया है। जो नदी का भौगोलिक कटाव के कारण इस इस स्थान को कटाव कहा जाने लगा। ब्रिटिश काल में इस दुर्गम और विशाल पहाड़ी क्षेत्र के बीच से आवागमन के लिए चट्टानों और पहाड़ों को काटकर एक संकरा रास्ता (मार्ग) बनाया गया था।

ऊँची पहाड़ियों के किनारे बनी इस सड़क से गुजरते हुए आज भी पर्यटकों को रोमांच की अनुभूति होती है। इसी मानवीय और प्राकृतिक “कटाव” के कारण इसका नाम कटाव पड़ा।

सनातन काल से ही इस शांत और दुर्गम प्राकृतिक घाटी में कई तपस्वियों और सिद्ध साधु-संतों ने गुफाओं में कठिन तपस्या की है। इस आध्यात्मिक महत्ता के कारण संतों की तपोभूमि (धाम) रूप में पूजा जाता है, इसलिए इसे कटाव धाम कहते हैं।

नेचर फोटोग्राफी: चीं-चीं और हुड़दंग: सैलानियों का मनोरंजन करते बंदर

Katav Majholi Jabalpur
Katav Majholi Jabalpur

कटाव धाम की सुबह पक्षियों की चहचहाहट और सैकड़ों वन्यजीव बंदरों की उछल-कूद के साथ होती है। यह स्थान अब इन वानरों के भोजन और आश्रय का मुख्य ठिकाना बन चुका है। सैलानी यहाँ आकर इन्हें चना और फल खिलाते हैं।

यहाँ पर आपको बहुत सारे लाल मुंह वाले बंदर वहुत ज्यादा संख्या में देखने को जरूर मिलेंगे। इसलिए आपको अपने समान और खास कर बैग वगैरा का ध्यान भी रखना होगा। नहीं तो बंदरों के हाथ लगने पर आप सिर्फ दूर से तमासा ही देख सकतें हैं।
(चेतावनी: यहाँ के बंदर काफी नटखट और शरारती हैं, इसलिए अपने बैग, मोबाइल और चश्मों का विशेष ध्यान रखें)

अगर आप कटाव धाम आते है, तो भगवान विष्णु बारह मझौली के दर्शन करने एक बार जरुर आयें

कटाव धाम के प्रमुख दर्शनीय स्थल और मंदिर (Major Attractions)

इनमे से एक मंदिर जो पहाड़ी की ऊंचाई पर बिल्कुल नदी के किनारे बना हुआ है। जो ठीक लाल मंदिर के ऊपरी चट्टानी पहाड़ के कारण लोगो के आकर्षण का केंद्र भी हैं।

कटाव धाम में घुमने और देखने के लिए अन्य स्थान एवं मंदिर

कटाव का झरना, कटाव का डैम, पठरा वाले महाराज का मंदिर, मोनी बाबा आश्रम मंदिर, रजक समाज की धर्मशाला, शंकर जी मंदिर, पर्वती जी मंदिर, हनुमान जी मंदिर, संत समाधि, श्रीपाल समाज की धर्मशाला, झारिया समाज धर्मशाला, शंकर जी बड़ा मंदिर, जंगली दादा की समाधि, शीतला माता मंदिर, संगम घाट, फलको नाला कटाव धाम मझौली जबलपुर।

लोड़ा सिद्ध धाम मंदिर, कटाव धाम मझौली जबलपुर

लोड़ा सिद्धाम मंदिर यह मंदिर पहाड़ी की ऊपरी सतह पर बना हुआ हैं। इस मंदिर तक आप आसानी से पहुँच सकते हैं। क्योंकि यहाँ पर मंदिर तक जाने के लिए मेन रोड बनाया गया हैं जिससे आप अपनी गाड़ी मंदिर तक ले जा सकते हैं। लेकिन गाड़ी चलाते समय गाड़ी पर विशेष ध्यान रखें क्योंकि यहाँ पर रोड के दोनों तरफ ऊँची-ऊँची खाई कटी हुईं हैं।

Lodha Shidh Katav Dham Majholi Jabalpur
लोढ़ा सिद्ध धाम कटव मझोली जबलपुर

सीताराम चरण महाराज

सीताराम चरण महाराज के बारे में आपने तो सुना ही होगा जिन्होंने सिहोरा में अभी गर्मी के समय में विश्व शांति महायज्ञ करवाया था। कटाव धाम में मेले के समय में महाराज जी यहाँ पर आते हैं। जिस समय सभी श्रद्धालुयों को सीताराम चरण महाराज के दर्शन की प्रतीक्षा रहती हैं।

Ranital Katav Majholi Jabalpur
Katav Dham Majholi

कटाव धाम वाले हनुमान जी का प्रसिद्ध ‘लाल मंदिर’

Best picnic Spot Katav Majholi Jabalpur
Katav Dham Majholi

नदी के ठीक दूसरे छोर पर पहाड़ी की ढलान पर बना लाल मंदिर (संकट मोचन पंचमुखी हनुमान मंदिर) बेहद आकर्षक है। पूरी तरह से लाल रंग में रंगे इस मंदिर तक पहुँचने के लिए नदी पर एक आकर्षक सस्पेंशन ब्रिज (पुल) बनाया गया है। बारिश के दिनों में जब नदी का जलस्तर बढ़ जाता है, तो सुरक्षा के लिहाज से पुल पर आवाजाही प्रतिबंधित कर दी जाती है।

प्राचीन प्राचीन शिव मंदिर

नदी के तट पर भगवान शिव का एक बेहद प्राचीन गर्भगृह है जहाँ स्थापित प्राचीन शिवलिंग पर भक्त जलाभिषेक करते हैं। सावन के महीने में यहाँ से मझौली के श्री विष्णु वराह मंदिर तक 8 किलोमीटर लंबी विशाल कांवड़ यात्रा निकाली जाती है, जो पूरे क्षेत्र को ‘बम-बम भोले’ के जयकारों से गुंजायमान कर देती है।

अद्वितीय श्रीराम मंदिर और वैदंती आश्रम

कटाव धाम में पूज्य महामंडलेश्वर आचार्य सियावल्लभ दास वेदांती महाराज के सानिध्य में एक अद्वितीय ‘श्री रामार्चन मंडपम’ (श्रीराम मंदिर) का निर्माण किया गया है, जिसे विश्व के सबसे अनोखे मंदिरों में से एक माना जा रहा है। इसके समीप ही प्राचीन मौनीबाबा / वैदंती आश्रम स्थित है, जहाँ आज भी देश-विदेश से साधु-संत आकर ध्यान लगाते हैं।

Vaidanti Ashram Katav Dham Majholi Jabalpur
वैदंती आश्रम कटव धाम मझौली जबलपुर

शनि मंदिर, कटाव धाम मझौली जबलपुर, कटाव का मेला जो 26 जनवरी सात दिवसीय मेला, कटाव धाम मझौली जबलपुर, निशुल्क चित्रकूट नेत्र शिविर, कटाव धाम मझौली जबलपुर, हर माह की 8 तारीख को चित्रकूट नेत्र शिविर का आयोजन होता हैं ।

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सिद्ध महाराज मृगनाथ मंदिर (पहाड़ी की चोटी पर)

Hanuman Shila Pahadi Katav Dham majholi Jabalpur
हनुमान शिला पहाड़ी कटाव धाम

पहाड़ी की सबसे ऊँची चोटी पर स्थित सिद्ध बाबा मृगनाथ (मृगेंद्र नाथ) जी का मंदिर इस पूरे क्षेत्र का सबसे बड़ा रहस्य है।

  • मनोकामना और चमत्कार: मान्यता है कि यहाँ सच्चे दिल से मांगी हर मन्नत पूरी होती है। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस मंदिर की चौखट पर आने से मिर्गी (Epilepsy) के मरीज पूरी तरह ठीक हो जाते हैं
  • एडवेंचर ट्रेक: यहाँ तक पहुँचने के लिए पर्यटकों को पहाड़ी पर चढ़ने के लिए बहुत ज्यादासैकड़ों सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं, जो बहुत ज्यादा थकाने वाला होता हैं। पहाड़ी के ऊपर से पूरे कटाव धाम की हरी-भरी वास्तुकला और घाटी का विहंगम दृश्य (Panoramic View) दिखाई देता है, जिसे देखने भर से सारी थकान दूर हो जाती हैं।

(सलाह: चढ़ाई के दौरान अपने साथ पानी की बोतल अवश्य रखें, क्योंकि ऊपर पानी मिलना कठिन है)

पंचमुखी हनुमान मंदिर, कटाव धाम

Panch Mukhi Hanuman Mandir Katav Dham Majholi Jabalpur
पंच मुखी हनुमान मंदिर कटव धाम मझौली जबलपुर

कटाव से 20 km आंगे बहोरीबंद के पास आपको रूपनाथ धाम देखने को मिलेगा।

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कटाव धाम कैसे पहुँचें? (How to Reach)

  • सड़क मार्ग (By Road): मझौली 7 किमी होते हुए यह सबसे सुगम माध्यम है। जबलपुर से यह दूरी लगभग 65 किमी है। आप जबलपुर-कटंगी बायपास रोड से भी 35 किमी का सफर तय करके यहाँ पहुँच सकते हैं। दमोह जिला मुख्यालय से यह लगभग 47 किमी दूर है।
  • रेल मार्ग (By Train): निकटतम मुख्य रेलवे स्टेशन जबलपुर जंक्शन (JBP) है, जो देश के सभी प्रमुख शहरों से जुड़ा है। स्टेशन से आप निजी टैक्सी या बसों के जरिए सीधे कटाव धाम पहुँच सकते हैं।
  • हवाई मार्ग (By Air): सबसे पास डुमना एयरपोर्ट, जबलपुर (JLR) है, जिसकी दूरी यहाँ से लगभग 75 किमी है।

घूमने का सबसे अच्छा समय (Best Time to Visit)

  1. मानसून (जुलाई से सितंबर): यदि आपको अद्भुत प्राकृतिक हरियाली, पहाड़ों से रिसता पानी और उफनती हुई नदी का लुत्फ उठाना है, तो बारिश के मौसम में यहाँ आएँ। इस समय यहाँ का सौंदर्य चरम पर होता है।
  2. शीतकाल (अक्टूबर से फरवरी): यह समय धार्मिक यात्राओं, सीढ़ियों की चढ़ाई और पिकनिक मनाने के लिए सबसे सुहावना और आरामदायक माना जाता है।

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मेला और उत्सव: जब जीवंत हो उठता है कटाव धाम

हर साल 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) के अवसर पर कटाव धाम के मैदान में एक विशाल 3-दिवसीय पारंपरिक मेले का आयोजन किया जाता है। इस मेले में दूर-दराज के जिलों से हजारों लोग आते हैं। तरह-तरह के झूले, पारंपरिक पकवान और बुंदेली-बघेली संस्कृति की दुकानें इस मेले की रौनक को दोगुना कर देती हैं।

कटाव धाम की त्वरित तुलना (Quick Overview)

मुख्य विशेषता
भौगोलिक स्थितिजबलपुर और दमोह जिले की सीमा (मझौली तहसील से 7 किमी)
पर्वत श्रृंखलाविंध्य और सतपुड़ा पहाड़ियों का संगम
प्रमुख नदियाँहिरन नदी एवं केन नदी
मुख्य मंदिरसिद्ध मृगनाथ मंदिर, लाल हनुमान मंदिर, शिव मंदिर, श्रीराम मंदिर
प्रसिद्धि का कारणप्राकृतिक कटाव, संतों की तपोभूमि, मिर्गी रोग निवारण की मान्यता, पिकनिक स्पॉट

इसके विपरीत कटाव धाम से 15km आंगे गुबरा से होते हुहे सिग्रामपुर के पास भैसा घाट जलप्रपात
जाते है तो वह भी प्रक्रति की गोद में वसा एक पर्यटन स्थल हैं।

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मृगन्न्नाथ महाराज का सिद्ध धाम, कटाव धाम मझौली जबलपुर

अमरनाथ धाम कटा पहुंचने के लिए आपको एक ऊंची पहाड़ी पर बहुत ही मुश्किल रास्ता वाली 717 सीढ़ियां पर आपको चल कर जाना होगा। यह ऊंची चढ़ाई आपको बहुत ही थका देने वाली होती है। दोपहर के समय तो या चढ़ाई करना बहुत ही मुश्किल हो जाता हैं।

आपको जब भी ऊपर सिद्धाम जाना होगा तो साथ में आप पानी की 1 बोतल साथ में अवश्य लेकर जाएं। ऊपर पहुंचने के बाद चारों तरफ क्षेत्र कब भव्य नजारा देखते ही बनता है। पहाड़ की चोटी में होने के कारण धाम बहुत अच्छा लगता है। यह चोटी क्षेत्र की सबसे ऊंची चोटियों में से एक है।

यह मृगन्न्नाथ बाबा जी का धाम बहुत ही प्रसिद्ध है। यहां पर कहां जाता है कि जिन मरीजों को मिर्गी जिसे फिट भी कहते हैं। अगर आती है और वह कहीं भी इलाज कराते हैं तो उन्हें आराम नहीं लगता हैं। पर यहाँ बाबा मृगंन्न्नाथ के दर्शन मात्र से ही मिर्गी के मरीज ठीक हो जाते हैं जिसके लिए यहाँ पर बहुत दूर-दूर से मिर्गी के मरीज बाबा मृगंन्न्नाथ के दर्शन करने के लिए आते हैं।

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लाल मंदिर कटाव धाम मझौली जबलपुर

कटाव के लाल मंदिर का एक स्वरुप देखने को मिलता है की यहाँ पर चाहे जितनी भी अधिक वर्षा क्यों न हो बाढ़ के जल का बहाव लाल मंदिर तक नहीं पहुँच पता हैं। यदि आप भी यह द्रश्य देखना चाहते हैं तो बरसात के मौसम में देखने के लिए आप यहाँ पर आ सकते हैं।

लेखक का नजरिया

आप में से बहुत से लोग कई बार कटाव धाम मझौली जबलपुर, मध्य प्रदेश घूमने को गए होगें , परन्तु शायद आप में से ज्यादातर लोंगो ने कटाव के पहाड़ जिसका एक चेहरा भी हैं, शायद आप लोंगों ने कभी न देखा हो, जब आप कटाव के मोड़ से सामने की तरफ वाली पहाड़ी को देखेंगे तो आपकों एक बहुत ही बड़े आकार का एक चेहरा दिखेगा।

Face Mountain Katav Dham Majholi Jabalpur
पर्वत मुख कटाव धाम मझौली जबलपुर

शायद ही आपने इससे विशाल आकृति का चेहरा और वो भी एक पर्वत को देखा हो, हम आशा करतें हैं की अब आप जब भी कटाव धाम घुमने जाएँगे तो आप भी इस चेहरे को देखेंगे और शायद एक शेल्फी भी लें।

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