क्या आप जानते हैं कि जबलपुर के पास एक ऐसी जगह भी है जहाँ प्रकृति ने खुद कुल्हाड़ी उठाकर दो विशाल पहाड़ों के बीच से नदी का रास्ता बना दिया? जब मैं पहली बार कटव धाम (Katav Dham Majholi) पहुँचा, तो वहाँ की रहस्यमयी खामोशी और दो ऊँची चट्टानों के बीच से गूंजती नदी की आवाज ने मेरी रूह को कंपा दिया था। अगर आप भी वही पुराने भीड़-भाड़ वाले टूरिस्ट स्पॉट्स देखकर ऊब चुके हैं और कुछ ऐसा देखना चाहते हैं जो सीधे आपके अंतर्मन को छू जाए, तो अपनी डायरी निकालिए क्योंकि आज मैं आपको मध्य प्रदेश के सबसे छिपे हुए स्वर्ग की यात्रा पर ले जा रहा हूँ।
जबलपुर और दमोह में रहने वालोँ के लिए कटाव धाम मात्र ₹ 500 के बजट में दो लोगों की बाइक यात्रा के रोमांचएक, अलौकिक, धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थल है। जहाँ पर कोई इंसान ने नहीं बल्कि प्राकृति ने दशरथ मांझी से भी पहले ही दो पहाड़ों का सीना चीरकर इस सुन्दर जगह को अपने हाँथों से तरसा है। अगर आपकों नेचर फोटोग्राफी शौक है तो, आइये कटाव जो दो पहाड़ों के बीच से गुजरती नदी का यह दृश्य सैलानियों का मन मोह लेता है।

ख़ूबसूरत नज़ारे चारों ओर ऊची-ऊची चट्टनों पर फैले घने जंगलों, उछल-कूंद करते नटखट बंदरों का समूह, पहाड़ी नदियों के तेज कटाव और पहाड़ों की चोटियों पर बने अनेक प्राचीन मंदिरों के कारण यह स्थान न केवल श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, बल्कि वाइल्डलाइफ और नेचर फोटोग्राफी के शौकीनों और घुमनेवालों के लिए भी स्वर्ग के समान है। जहाँ चिड़ियों की चिह-चिह बंदरों की उछल-कूंद से दिन की शुरुबात।
मात्र ₹500 में दो लोगों का पूरा ट्रिप: बजट ट्रैवल गाइड
अगर आप जबलपुर के रहने वाले हैं और जेब में ज्यादा पैसे नहीं हैं, तो चिंता छोड़िए। मैंने और मेरे दोस्त ने यह पूरी यात्रा ₹500 के अंदर पूरी की और रास्ता पूरी तरह बाइक राइडर्स के लिए जन्नत है।:
- पेट्रोल का खर्च: जबलपुर से मझौली के आगे तक बाइक का आना-जाना मात्र ₹250 से ₹300 के पेट्रोल में आराम से हो जाता है।
- खाने-पीने का जुगाड़: घर से कुछ हल्का-फुल्का नाश्ता पैक कर लें या मझौली लोकल मार्केट में रुककर गरमा-गरम समोसे और पोहे का मजा लें, जो ₹100-₹150 में दो लोगों के लिए काफी है। यहाँ कोई एंट्री टिकट या हिडन चार्ज नहीं है, यह प्राकृतिक नजारा पूरी तरह मुफ्त (Free) है।
जबलपुर जिले से 50 किलोमीटर दूर और मझौली तहसील से महज 7 किमी की दूरी पर गुबरा-दमोह रोड पर स्थित यह सिद्धधाम विंध्य और सतपुड़ा की गगनचुम्बी पर्वत श्रृंखलाओं के अद्भुत मेल (संगम) का जीवंत गवाह है। इस स्थान पर ज्यादातर लोग अपने मित्रों एवं परिवार के साथ पिकनिक मनाने आते हैं

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मैंने जब पहली बार देखा कटाव धाम का वो जादुई नजारा
जैसे ही मेरी गाड़ी मझौली से आगे बढ़ी, चारों तरफ फैली घनी हरियाली ने मेरा स्वागत किया। लेकिन असली रोमांच तब शुरू हुआ जब अचानक दो विशालकाय पहाड़ सामने आ गए, ऐसा लगा मानो किसी महामानव ने इन्हें बीच से काट दिया हो। इसी वजह से स्थानीय लोग इसे कटाव धाम कहते हैं।
वहाँ बहती पहाड़ी नदी का साफ पानी जब इन चट्टानों से टकराता है, तो एक अद्भुत संगीत पैदा होता है। मैंने वहाँ बने प्राचीन शिव मंदिर में माथा टेका और सच मानिए, जो सुकून मुझे वहाँ पत्थरों पर बैठकर मिला, वो बड़े-बड़े फाइव-स्टार होटलों में भी नहीं मिल सकता। हाँ, एक बात का ध्यान रखिएगा—वहाँ बंदर बहुत ज्यादा हैं, तो अपने चश्मे और मोबाइल को थोड़ा संभालकर रखिएगा, नहीं तो वो सीधे नदी में जा सकते हैं!

कटाव धाम एंट्री टिकट और सफारी बुकिंग प्राइस (Entry Ticket & Timings)
अच्छी बात यह है कि इस प्राकृतिक अजूबे को देखने के लिए सरकार कोई एंट्री टिकट नहीं लेती है, यहाँ आना पूरी तरह मुफ्त (Free) है।
- समय: सुबह 06:00 बजे से शाम 06:00 बजे तक।
- सलाह: मेरा सुझाव है कि आप सूर्यास्त (Sunset) के समय यहाँ रहें, जब डूबते सूरज की किरणें दो पहाड़ों के बीच से पानी पर पड़ती हैं, तो वो नजारा कैमरे में कैद करने लायक होता है।
जाने इस जगह को ‘कटाव धाम‘ क्यों कहतें हैं?
यहाँ बहने वाली हिरन और केन नदी की तेज धाराओं ने हजारों वर्षों में विशाल चट्टानों को बीच से काटकर एक गहरी, मनमोहक घाटी (Gorge) का निर्माण किया है। जो नदी का भौगोलिक कटाव के कारण इस इस स्थान को कटाव कहा जाने लगा। ब्रिटिश काल में इस दुर्गम और विशाल पहाड़ी क्षेत्र के बीच से आवागमन के लिए चट्टानों और पहाड़ों को काटकर एक संकरा रास्ता (मार्ग) बनाया गया था।

ऊँची पहाड़ियों के किनारे बनी इस सड़क से गुजरते हुए आज भी पर्यटकों को रोमांच की अनुभूति होती है। इसी मानवीय और प्राकृतिक “कटाव” के कारण इसका नाम कटाव पड़ा। सनातन काल से ही इस शांत और दुर्गम प्राकृतिक घाटी में कई तपस्वियों और सिद्ध साधु-संतों ने गुफाओं में कठिन तपस्या की है। इस आध्यात्मिक महत्ता के कारण संतों की तपोभूमि (धाम) रूप में पूजा जाता है, इसलिए इसे कटाव धाम कहते हैं।
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कटाव धाम रिव्यु
| मुख्य विशेषता | देखने को मिलेगीं |
|---|---|
| भौगोलिक स्थिति | जबलपुर और दमोह जिले की सीमा (मझौली तहसील से 7 किमी) |
| पर्वत श्रृंखला | विंध्य और सतपुड़ा पहाड़ियों का संगम |
| प्रमुख नदियाँ | हिरन नदी एवं केन नदी |
| मुख्य मंदिर | सिद्ध महाराज मृगनाथ मंदिर( पहाड़ी की चोटी पर मुश्किल चड़ाई रास्ता वाली 717 सीढ़ियां), लाल हनुमान मंदिर, शिव मंदिर, श्रीराम मंदिर |
| प्रसिद्धि का कारण | प्राकृतिक कटाव, संतों की तपोभूमि, मिर्गी रोग निवारण की मान्यता, पिकनिक स्पॉट |
कटाव धाम एडवेंचर ट्रेक
यहाँ तक पहुँचने के लिए पर्यटकों को पहाड़ी पर चढ़ने के लिए बहुत ज्यादासैकड़ों सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं, जो बहुत ज्यादा थकाने वाला होता हैं। पहाड़ी के ऊपर से पूरे कटाव धाम की हरी-भरी वास्तुकला और घाटी का विहंगम दृश्य (Panoramic View) दिखाई देता है, जिसे देखने भर से सारी थकान दूर हो जाती हैं।
“मेरी सलाह: चढ़ाई के दौरान अपने साथ पानी की बोतल अवश्य रखें, क्योंकि ऊपर पानी मिलना कठिन है।”

बाबा मृगनाथ की सबसे ऊँची चोटी और वो विहंगम नजारा
जैसे ही आप मझौली पार करते हैं, दोनों तरफ फैली खूबसूरत हरी-भरी पहाड़ियाँ आपका स्वागत करती हैं। यहाँ की सबसे बड़ी खासियत है कटाव धाम की सबसे ऊँची चोटी पर बना बाबा मृगनाथ का मंदिर। जब मैंने नीचे अपनी बाइक खड़ी की और ऊपर चोटी की तरफ चढ़ना शुरू किया, तो थोड़ी ही देर में मेरी सारी थकान गायब हो गई।
चोटी पर खड़े होकर जब आप नीचे बहती केन नदी के कटाव को देखते हैं, तो वो नजारा वाकई रोंगटे खड़े कर देने वाला होता है। हाँ, एक बात की गलतफहमी दूर कर दूँ—अगर आप नदी के ठीक वेस्ट (पश्चिम) साइड की पहाड़ी पर खड़े होकर डूबता सूरज देखने की सोच रहे हैं, तो ऐसा नहीं होगा, क्योंकि वहाँ की पहाड़ी की बनावट के कारण सूर्यास्त सीधे नहीं देखा जा सकता। लेकिन चोटी से दिखने वाला चारों तरफ का हरा-भरा नजारा आपके हर एक पैसे (और समय) को वसूल कर देगा!
जब मैं और मेरा दोस्त अपनी बाइक उठाकर मझौली पार कर इस छिपे हुए स्वर्ग यानी कटाव धाम (Katav Dham Majholi) पहुँचे, तो हमारी आँखें फटी की फटी रह गईं। अगर इंटरनेट पर घिसे-पिटे ब्लॉग्स पढ़कर आप भी बोर हो चुके हैं, तो ठहरिए; आज मैं आपको जबलपुर के इस असली अजूबे की उस चोटी पर ले जा रहा हूँ जहाँ से पूरी दुनिया का एक अलग ही विहंगम नजारा दिखता है।

अगर आप भी इन मनमोहक द्रश्यों के बीच अपना कुछ समय बिताने और शांति का अनुभव करना चाहतें हैं तो आप भी पवित्र एवं धार्मिक पर्यटक स्थल कटाव धाम आ सकते है। मैं भी कटाव धाम के पास मझौली में रहता हूँ। और जब भी मुझे टाइम मिलता है तो मैं कटाव धाम घूमने चला जाता हूँ, जहाँ मुझे अत्याधिक शांति और सुख का अनुभव होता है।
नेचर फोटोग्राफी: चीं-चीं और हुड़दंग: सैलानियों का मनोरंजन करते बंदर

कटाव धाम की सुबह पक्षियों की चहचहाहट और सैकड़ों वन्यजीव बंदरों की उछल-कूद के साथ होती है। यह स्थान अब इन वानरों के भोजन और आश्रय का मुख्य ठिकाना बन चुका है। सैलानी यहाँ आकर इन्हें चना और फल खिलाते हैं।
यहाँ पर आपको बहुत सारे लाल मुंह वाले बंदर वहुत ज्यादा संख्या में देखने को जरूर मिलेंगे। इसलिए आपको अपने समान और खास कर बैग वगैरा का ध्यान भी रखना होगा। नहीं तो बंदरों के हाथ लगने पर आप सिर्फ दूर से तमासा ही देख सकतें हैं।
(चेतावनी: यहाँ के बंदर काफी नटखट और शरारती हैं, इसलिए अपने बैग, मोबाइल और चश्मों का विशेष ध्यान रखें)।
अगर आप कटाव धाम आते है, तो भगवान विष्णु बारह मझौली के दर्शन करने एक बार जरुर आयें
कटाव धाम के प्रमुख दर्शनीय स्थल और मंदिर (Major Attractions)
कटाव का झरना, कटाव का डैम, पठरा वाले महाराज का मंदिर, मोनी बाबा आश्रम मंदिर, रजक समाज की धर्मशाला, शंकर जी मंदिर, पर्वती जी मंदिर, हनुमान जी मंदिर, संत समाधि, श्रीपाल समाज की धर्मशाला, झारिया समाज धर्मशाला, शंकर जी बड़ा मंदिर, जंगली दादा की समाधि, शीतला माता मंदिर, संगम घाट, फलको नाला कटाव धाम मझौली जबलपुर।

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कटाव धाम का मेला
जबलपुर जिले की बहुत ही प्रसिद्ध जगह कटाव धाम है। जो एक जगह धार्मिक है। यहाँ पर हर साल 26 जनवरी के समय विशाल मेले का आयोजन किया जाता है। वहां पर स्थित मैदान में यह मेला लगाया जाता है। इस मेले में तरह-तरह के झूले देखने के लिए मिलते हैं दुकानें भी सामानों से भरी रहती हैं। आप भी यहां पर आकर घूमने का मजा ले सकते हैं। दूर-दूर से लोग यहाँ पर मेले का आनंद लेने के लिए आते हैं। तरह-तरह के झूले, पारंपरिक पकवान और बुंदेली-बघेली संस्कृति की दुकानें इस मेले की रौनक को दोगुना कर देती हैं।

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कटाव धाम कैसे पहुँचें? (How to Reach)
सड़क मार्ग (By Road): यह सबसे सुगम माध्यम है।
- जबलपुर से कटंगी बायपास गुबरा रोड से होते हुए 50 किमी और मझौली से होते हुए 50 किमी दूर,
- मझौली से 6 किमी दूर ,
- गुबरारोड 6 किमी दूर,
- दमोह से 6 किमी दूर,
- वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व सिग्रामपुर से 15 किमी दूर,
- बहोरीबंद (कटनी) रूपनाथ धाम दे20 किमी दूर।
रेल मार्ग (By Train): निकटतम मुख्य रेलवे स्टेशन जबलपुर जंक्शन (JBP) है, जो देश के सभी प्रमुख शहरों से जुड़ा है। वहाँ से आप सीधे [प्राइवेट टैक्सी बुक] करके 1 से डेढ़ घंटे में पहुँच सकते हैं।
हवाई मार्ग (By Air): सबसे पास डुमना एयरपोर्ट, जबलपुर (JLR) है, जिसकी दूरी यहाँ से लगभग 75 किमी है।
नोट: हवाई मार्ग का सच: इंटरनेट पर लोग लिख देते हैं कि डुमना एयरपोर्ट से आएं, लेकिन सच तो यह है कि यहाँ आने वाला कोई भी टूरिस्ट हवाई मार्ग से ना के बराबर ही आता है। यह विशुद्ध रूप से स्थानीय लोगों, बाइकर्स और प्रकृति प्रेमियों का पसंदीदा स्पॉट है।
425 ईस्वी पूर्व में निर्मित 36 हिंदू मंदिरों का समूह तिग्मा कंकाली देवी मंदिर बहोरिबंद
कटाव धाम रुकने और ठहरने की उत्तम जगह (Where to Stay)
चूंकि यह एक पवित्र और प्राकृतिक स्थल है, यहाँ रुकने की कोई व्यवस्था नहीं है। आपको अपनी ट्रिप डे-पिकनिक की तरह प्लान करनी चाहिए और ठहरने के लिए हैं। आपको जबलपुर शहर में ही रुकना चाहिए। आपके बजट के अनुसार मेरे कुछ निजी सुझाव ये हैं:
- बजट ऑप्शंस(Budget Stay): यदि आप कम खर्च में अच्छी जगह चाहते हैं, तो जबलपुर रेलवे स्टेशन के पास बेहतरीन [सस्ते और साफ-सुथरे होटल्स] आसानी से मिल जाते हैं। जहाँ ₹1000 से ₹1500 में अच्छा कमरा मिल जाता है।
- मिड-रेंज और कम्फर्ट (Mid-Range Stay): अगर आप फैमिली के साथ आ रहे हैं, तो विजयनगर एरिया में या सिविल लाइंस एरिया में [थ्री-स्टार होटल्स] बुक कर सकते हैं। जो सुरक्षा और सुविधा के मामले में लाजवाब हैं।
- Luxury Stay: एक लग्जरी और यादगार अनुभव के लिए आप भेडाघाट के पास बने [प्रीमियम रिसॉर्ट्स] बुक कर सकते हैं, जहाँ से नर्मदा नदी का नजारा दिखता है।
सफर के दौरान चोटी पर चढ़ने के लिए आपके पास आरामदायक [ट्रैवल शूज] और धूप से बचने के लिए एक अच्छी [सनग्लासेस] जरूर होनी चाहिए। इसके साथ ही, सफर को आरामदायक और सुरक्षित बनाने के लिए आपके पास एक मजबूत [ट्रैवल वॉटर बॉटल] और चलते-फिरते तस्वीरें खींचने के लिए एक अच्छा [मोबाइल ट्राइपॉड] जरूर होना चाहिए, क्योंकि यहाँ फोटोग्राफी के लिए कमाल के एंगल्स मिलते हैं।
घूमने का सबसे अच्छा समय (Best Time to Visit)
- मानसून (जुलाई से सितंबर): यदि आपको अद्भुत प्राकृतिक हरियाली, पहाड़ों से रिसता पानी और उफनती हुई नदी का लुत्फ उठाना है, तो बारिश के मौसम में यहाँ आएँ। इस समय यहाँ का सौंदर्य चरम पर होता है।
- शीतकाल (अक्टूबर से फरवरी): यह समय धार्मिक यात्राओं, सीढ़ियों की चढ़ाई और पिकनिक मनाने के लिए सबसे सुहावना और आरामदायक माना जाता है।
जबलपुर का वो रहस्यमयी जगह जहाँ देवी करती हैं जीवंत चमत्कार से बस 12 किमी दूर
लेखक का नजरिया: कटाव धाम पहाड़ के पास अपना एक चेहरा भी जाओ और देख लो

आप में से बहुत से लोग कई बार कटाव धाम मझौली जबलपुर, मध्य प्रदेश घूमने को गए होगें , परन्तु शायद आप में से ज्यादातर लोंगो ने कटाव के पहाड़ जिसका एक चेहरा भी हैं, शायद आप लोंगों ने कभी न देखा हो, जब आप कटाव के मोड़ से सामने की तरफ वाली पहाड़ी को देखेंगे तो आपकों एक बहुत ही बड़े आकार का एक चेहरा दिखेगा।
कटाव धाम कहां पर स्थित है
मध्यप्रदेश में स्थित जबलपुर जिले का एक मुख्य पर्यटन स्थल है। कटाव घाट जबलपुर जिले में मझौली तहसील से 7 किलोमीटर की दुरी में स्थित है।
कटाव धाम आसपास के टूरिस्ट प्लेसेज (200 किमी के दायरे में)
अगर आप कटाव धाम का सफर तय कर रहे हैं, तो अपनी लिस्ट में इन जगहों को दो अलग श्रेणियों में शामिल कर सकते हैं:
1. लोकल और छिपे हुए स्पॉट्स (Local & Hidden Gems)
- नोहटा शिव मंदिर (Nohata Temple): चंदेल कालीन कलाकृति का बेजोड़ नमूना।
- रूपनाथ धाम (Roopnath): बहोरीबंद के पास स्थित भगवान शिव का बेहद प्राचीन और ऐतिहासिक स्थल।
- बांदकपुर और कुंडलपुर पटेरा: जागेश्वर नाथ धाम (बांदकपुर) और जैन तीर्थ क्षेत्र कुंडलपुर अध्यात्म के बड़े केंद्र हैं।
- भगवान विष्णु वराह मझौली: की रहस्यमयी काली प्रतिमा में छिपे है और भी गहरे राज।
- मदन महल किला और बैलेंसिंग रॉक: जबलपुर शहर के अंदर ही है (लगभग 45 किमी)।
2. विश्व प्रसिद्ध टूरिस्ट प्लेसेज (Famous Tourist Spots)
- वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व: मध्य प्रदेश का नया और बेहद खूबसूरत टाइगर रिजर्व।
- कान्हा नेशनल पार्क (Kanha): बाघों के दीदार के लिए दुनिया भर में मशहूर वाइल्डलाइफ डेस्टिनेशन, जहाँ की [सफारी ऑनलाइन बुकिंग] लोग महीनों पहले करते हैं।
- भेड़ाघाट और धुआंधार वॉटरफॉल (Jabalpur):: नर्मदा नदी का विश्व प्रसिद्ध संगमरमर वाला रूप। कटाव धाम से लगभग 60 किमी। यहाँ की संगमरमर की चट्टानों के बीच [बोटिंग का अनुभव] आपको जिंदगी भर याद रहेगा।
- बरगी डैम (Bargi Dam): जबलपुर के पास क्रूज और वॉटर स्पोर्ट्स के लिए बेहतरीन जगह।
- बान्डवगढ़ नेशनल पार्क (Umaria): यहाँ से लगभग 140 किमी दूर है। अगर आपको बाघों को करीब से देखना है, तो इसकी [सफारी ऑनलाइन बुकिंग] एडवांस में जरूर करा लें।
- मैहर माता मंदिर (Maihar): त्रिकूटा पहाड़ी पर स्थित यह प्रसिद्ध शक्तिपीठ यहाँ से लगभग 130 किमी दूर है।
अब आपकी बारी: क्या आप कभी ऐसी रहस्यमयी जगह गए हैं?
बॉस, कटाव धाम के इस ऊंचे पहाड़ और केन नदी के इस अनोखे संगम को अपनी आँखों से देखना एक अलग ही अहसास है। क्या आपने पहले कभी बाबा मृगनाथ की चोटी से जबलपुर का यह रूप देखा है, या आप भी उन लोगों में से हैं जो सिर्फ भेड़ाघाट तक ही सीमित रह गए?
बाबा मृगनाथ के दर्शन के लिए आप कब निकल रहे हैं?
बॉस, कटाव धाम की यह खूबसूरती शब्दों से ज्यादा आँखों से देखने वाली है। क्या आपने कभी दो पहाड़ों के बीच से गुजरती इस सड़क की कोई रील या फोटो देखी है? या फिर आपके पास भी मध्य प्रदेश की किसी ऐसी ही अनसुनी और जादुई जगह की कहानी है?
अगर आप भी इस वीकेंड सिर्फ ₹500 में एक यादगार सफर पर निकलना चाहते हैं, तो नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं कि आप अपनी बाइक पर किसे साथ ले जा रहे हैं, मुझे आपके कमेंट्स का इंतजार रहेगा! इस सटीक और जमीनी गाइड को अपने जबलपुर वाले दोस्तों के साथ शेयर करना मत भूलना और ऐसी ही अनसुनी जगहों की सच्ची कहानियों के लिए हमारे ब्लॉग को अभी सब्सक्राइब करें!
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“धर्मेंद्र सिंह आर्यन गो में सीनियर डिजिटल कंटेंट राइटर कार्यरत है। उम्र 40 साल है, शैक्षिणिक योग्यता दर्शनशास्त्र में एम.फिल है, मुझे किताबें पढ़ने, लेखन और यात्रा करने का शौक है, मेरा आहार शुद्ध शाकाहारी भोजन है। मुझे भारत के छिपे हुए पर्यटक स्थलों की खोज करने और उन पर लेख लिखने का गहरा जुनून है।
पिछले 18 वर्षों से, मैंने एक ट्रैवल गाइड के रूप में अमूल्य अनुभव एकत्र किए हैं, जिन्हें मैं अब अपने ब्लॉग के माध्यम से गर्व से साझा करता हूं। मेरा लक्ष्य आपको भारत के सबसे आकर्षक यात्रा स्थलों के बारे में आकर्षक और व्यावहारिक जानकारी प्रदान करना है, साथ ही अन्य उपयोगी ज्ञान जो आपकी यात्रा को बेहतर बनाता है।
मैंने एक ब्लॉगर, YouTuber और डिजिटल मार्केटर के रूप में अपनी भूमिकाएँ निभाई हैं। मैं प्रकृति की गोद में बसे एक छोटे से गाँव में अपने शांतिपूर्ण जीवन से प्रेरणा लेता हूँ। मेरी यात्रा दृढ़ता और समर्पण की रही है, क्योंकि मैंने अपने सपनों को वास्तविकता में बदलने के लिए कड़ी मेहनत की है। अपने ब्लॉग के माध्यम से, मैं अपने द्वारा अर्जित ज्ञान को साझा करना चाहता हूँ और दूसरों को रोमांचकारी यात्रा करने के लिए प्रेरित करना चाहता हूँ।“













