Ashoknagar

Ashoknagar : अशोकनगर में घुमने की जगह

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Ashoknagar : अशोकनगर, मध्य प्रदेश के सबसे सुन्दर जिला में से एक है जो सिंध और वेतवा नदी के संगम के मध्य बसा इन दो नदियों के बीच बसा होने के कारण यहाँ की सुन्दरता और भी अधिक बढ़ जाती हैं। अशोकनगर जो सिंध और वेतवा नदी का उद्गम स्थल माना भी जाता है और ऐसा माना जाता है कि महान सम्राट अशोक, उज्जैन को जीतकर वापिस जाते समय एक रात के लिए इस क्षेत्र में रुके थे, इसलिए इस क्षेत्र का नामकरण महान सम्राट अशोक के नाम पर रखा गया है।

अशोकनगर को पहले गुना जिला के अंतर्गत आता था। जो 15 अगस्त 2003 को अशोकनगर को अलग जिला घोषि‍त किया गया। जिले की पूर्वी और पश्चिमी सीमाये नदियो के द्वारा अन्य जिले कि सीमाओ से विभक्त है, बेतबा जिले के पूर्वी भाग मे बहती है जो कि सागर जिला एवं उत्तरप्रदेश के ललितपुर जिले से विभक्त करती है। सिन्ध मुख्य नदी के रुप मे पश्चिमी सीमा के साथ बह रही है। अशोकनगर पूर्व मे पछार के नाम से जाना जाता था

देश भर में सबसे बड़ी गेहूँ अनाज का बाजार अशोकनगर को माना जाता है। 2003 तक मध्यप्रदेश में अशोकनगर गुना जिले का एक हिस्सा था। जिसका क्षेत्रफल बड़ा होने के कारण सरकार ने इसे अलग से जिला घोषित कर दिया है। अशोकनगर हाथ से बनी हथकरघा चंदेरी साड़ियों के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध हैं। साथ ही ब्रोकेड्स और मसलिन के लिए काफी प्रसिद्ध है। यहाँ के इतिहास में चंदेली खुनी दरवाजा व जौहर कुस्थित है सन 1528 ईसवी में मुगल शासक बाबर के द्वारा चंदेरी के राजपूत शासक मेदनी राय राजपूत से चदेरी का युद्ध लड़ा गया था । चंदेली के युद्ध में बाबर ने दुश्मनों के इतने अधिक सिर काट डाले की एक मीनार खड़ा हो सकता है।

अशोक नगर के भूनानगर में खुली जेल स्थापित की गई है। वर्तमान में अशोक नगर उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले की सीमा से सटा हुआ ग्वालियर संभाग के अंतर्गत आने वाला जिला है । यहाँ की प्रकृति बहुत की सुशील व शांत हे जो की यहाँ की प्रकृति को बार्कारार रखती है इस स्थाल में पवन के झोके आते की रहते हैं जो यहाँ का वातावरण शुद्ध बनाये रखते है पवन के झोके जब हमें लगते है तो हमें महसूस होता है की इस खास जगह पर रहने का बात ही अलग है जो हमारे जीवन में अनेक बदलाव कर सकती है।

अशोकनगर में घूमने की जगहें:

ज्यादातर लोग यहाँ पर बरसात के मौषम के बाद आते है क्योंकि बरसात के बाद के सभी स्थलों के चरों ओर हरयाली ही हरयाली दिखाई देती हैं। जिससे यहाँ की सुन्दरता और बढ़ जाती है जो हमारे मान को और अधिक भने लगती हैं। यह एक ऐसा नगर है जहा पर आपको बहुत सारे प्राचीनकाल के स्थल देखने को मिलते है यह लम्बे समय से ही अपना स्थापित्य जमाये हुए है जैसे- जागेश्वरी देवी का मेला,चन्देली दुर्गा,विन्ध्यावास्नी माता का मन्दिर,बादाम मेहल,कोसिक मेहल,शहजादी का रोजा,जामा मज्जिद,देवगढ़ का लालकिला तथा अन्य स्थल भी मौजूद है जो बहुत ही रोमंचक है।

कोशाक महल

किले के अंदर, जटिल सजावट इसके आंतरिक भाग को सुशोभित करती है। ऐसा कहा जाता है कि यह स्मारक कुछ अज्ञात राजकुमारियों को समर्पित है, जिनकी कई कब्रें इसके परिसर में पाई गई हैं। इसलिए, इस स्मारक को देखने के लिए काफी संख्या में लोग आते हैं।

बादल महल गेट

बादल महल गेट भी अशोकनगर में पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है। इस महल में बना द्वार दोहरे धनुष के आकार का है। महल गोलाकार है और किनारों पर पतला है। आप इस जगह पर जा सकते हैं. यह एक शानदार 7 मंजिला इमारत है। यह जगह पर्यटकों को बेहद लुभाती है। यहां के राजा और रानी के महल को देखने पर ऐसा लगता है कि वे एक-दूसरे के आसपास खड़े हैं। यहां की वास्तुकला देखने लायक है। यहां कई अलग-अलग शैलियां बनाई गई हैं।

इन इमारतों का निर्माण भी अलग-अलग समय पर किया गया था। इस महल के अंदरूनी हिस्सों को खूबसूरती से सजाया गया है। खास बात यह है कि यह जगह कुछ अज्ञात राजकुमारियों को समर्पित है। यहां कई कब्रें भी बनी हुई हैं। यहां बड़ी संख्या में लोग आते हैं.

चंदेरी म्यूज़ियम

चंदेरी

मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले में बुन्देलखंड और मालवा की सीमा पर स्थित चंदेरी का इतिहास 11वीं शताब्दी से जुड़ा है। 11वीं से 18वीं सदी तक अच्छे और बुरे दोनों दौर का गवाह रहा यह शहर ऐतिहासिक महत्व से भरा हुआ है। चंदेरी में कई चीजें हैं जो पर्यटन को बढ़ावा देती हैं, जैसे चंदेरी किला, चंदेरी संग्रहालय, जैन मंदिर और खूबसूरत झीलें।

चंदेरी मालवा के सुल्तानों और बुंदेला राजपूतों के समय से ऐतिहासिक महत्व रखता है जिन्होंने 15वीं और 16वीं शताब्दी में इस क्षेत्र पर शासन किया था। खूबसूरत पहाड़ियों, झीलों और जंगलों से घिरा यह मनोरम स्थल अपनी चंदेरी साड़ियों और ऐतिहासिक स्मारकों के लिए प्रसिद्ध है, जो हर साल बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित करता है। इसके अलावा, शानदार जैन स्मारक, प्रसिद्ध त्रिकाल चौबीसी, खंडारजी और उनकी आकर्षक संस्कृति चंदेरी को मध्य प्रदेश के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से एक बनाती है।

चंदेरी किला

अशोकनगर में चंदेरी किला सबसे प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्मारकों में से एक है। इसे देखने और यहां घूमने के लिए कई पर्यटक आते हैं। इस किले का निर्माण बुंदेला राजपूतों ने करवाया था। इस किले का मुख्य द्वार महमूद खिलजी ने बनवाया था। यहां बना दरवाजा खूनी गेट के नाम से मशहूर है। यह स्थान प्राकृतिक सुंदरता के बीच बसा हुआ है।

हथकरघा चंदेरी साड़ियां

यहां एक मशहूर बाजार भी है जहां आपको हथकरघा चंदेरी साड़ियां मिल जाएंगी।

आनंदपुर

आनंदपुर भारत के मध्य प्रदेश राज्य के अशोकनगर जिले की ईसागढ़ तहसील में स्थित एक गाँव है। यह जिला मुख्यालय, अशोकनगर से लगभग 42 किलोमीटर उत्तर में और राज्य की राजधानी भोपाल से 217 किलोमीटर दूर है, जबकि ईसागढ़ 12 किलोमीटर दूर है। भक्ति और आध्यात्मिकता के एक प्रमुख केंद्र के रूप में प्रसिद्ध, श्री आनंदपुर वह स्थान है जहाँ सत्य के साधक आध्यात्मिक ज्ञान और शांति प्राप्त करते हैं।

कटी घाटी गेटवे

बादल महल गेट देखने के लिए पर्यटकों की आमद अच्छी खासी है। इस महल का प्रवेश द्वार अनोखे आकार में दोहरे धनुष जैसा है। यह महल अपने आप में एक शानदार सात मंजिला इमारत है, जिसे पर्यटक बहुत पसंद करते हैं। राजा रानी महल की वास्तुकला उन्हें एक साथ खड़े होने का आभास देती है, हालांकि इसका निर्माण अलग-अलग समय पर किया गया था।

खूनी दरवाज़ा चंदेरी

चंदेरी किला एक प्रसिद्ध स्मारक के रूप में खड़ा है, जिसका निर्माण बुंदेला राजपूतों द्वारा किया गया था। इसका मुख्य प्रवेश द्वार, जो “खूनी दरवाज़ा” के नाम से प्रसिद्ध है, महमूद खिलजी द्वारा बनवाया गया था। किले में पहाड़ियाँ और जंगल हैं, जो आगंतुकों के लिए इसके आकर्षण को बढ़ाते हैं।

पुरातात्विक संग्रहालय

राजघाट बांध

रामनगर पैलेस

श्री चौबीसी जैन मंदिर

श्री चौबीसी जैन मंदिर सिद्ध क्षेत्र में पवित्र स्थल पर 26 मंदिरों का एक समूह शामिल है। इस पवित्र स्थान को समृद्ध व्यापारी पद्मशाह के शासनकाल के दौरान प्रसिद्धि मिली। थूबोन जी तीर्थयात्रियों को शांति, शांति और स्नेह का संदेश देते हैं।

थूबोन जी सिद्ध क्षेत्र

इसके अलावा अशोकनगर में थूबोन जी सिद्ध क्षेत्र में 26 मंदिर हैं। पर्यटक इस स्थान की भव्यता को देख सकते हैं। यह पवित्र स्थानों में से एक है। पद्मशाह के शासनकाल में थूबोन जी एक प्रसिद्ध व्यापारी थे। यहां पहुंचने पर पर्यटकों को शांति का अनुभव होता है। इसके अलावा, यह तीर्थयात्रियों को शांति, अहिंसा और स्नेह का संदेश देता है।

जामा मस्जिद

यहां की जामा मस्जिद अनोखी और अलग है। यह भारत की एकमात्र मस्जिद है जिसमें मीनार नहीं है। यहां के गुंबद और लंबे बरामदे काफी खूबसूरत हैं। इसके अग्रभाग पर सुंदर पुष्प पैटर्न उकेरे गए हैं, जो पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। आप यहां घूमने के लिए भी आ सकते हैं। ये जगह सबसे खूबसूरत है. यहां बहुत से पर्यटक घूमने आते हैं। यहां की खूबसूरती लोगों को मंत्रमुग्ध कर देती है।

अशोकनगर गुनना जिला से अलग होने के कारण एक यात्रा स्थल बन चुका है यहाँ की यात्रा करने में आपको बहुत सारे स्थल देखने को मिलेगें जो प्राचीन काल से निर्मित हैं जहाँ दूर दूर से लोग यात्रा करने के लिए आते है। यहाँ की यात्रा करने में हमें सम्राट अशोक के जीवनकाल के बारे में अनेक महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्राप्त होती हैं जो सम्राट अशोक की वीरगाथा को दर्शाती हैं।

यहाँ पर अशोकनगर का निर्माण 11 वी शताब्दी में प्रतिहर शासके कीर्तिपाल ने आपने शासनकाल में करवाया था यहाँ पर साड़ीयों का रेट पुरे में प्रसिद्ध है क्योंकि यहाँ के लोग साड़ियाँ का निर्माण खुद करते है यहाँ पर अनेक अन्य कई स्थल मौजूद हैं जो इस नगर को और भी सुन्दर बनाते हैं।

नज़ारे की द्रस्ती से हम देखे तो अशोक बड़ा ही प्राचीन वीर योद्धाओं का स्थान रहा है जो सम्राट अशोक के नाम पर रखा गया यहाँ का द्रश्य बहुत ही सुन्दर है जो यहाँ की कल्पनाओं का प्रतिक है। यहाँ का नजारा अति सुन्दर है।

इस स्थान को देखने के बाद ऐसा प्रतीत होता है जैसे हम वीर रस की कल्पना कर रहे हों। यहाँ में महलों की बनाबट अलग प्रकार की होती हैं। जो देखने मन भावक होते है व हमें आपनी ओर आकर्षित करते है यहाँ का नजारा देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग आते है।

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